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Sunday, December 08, 2024

इसरो की अनूठी सफलता।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बीते गुरुवार यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के बहुप्रतीक्षित प्रोबा- 3 (PROBA-3) अंतरिक्षयान को अपने सबसे भरोसेमंद बाहुबली कहे जाने वाले पीएसएलवी C-59 प्रक्षेपण यान की सहायता से पूरी सटीकता के साथ उसके निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रमोचित किया।

प्रोबा 3 विश्व का प्रथम उन्नत सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग मिशन (Advanced Precision Formation Flying Techniques) है।



इसरो इस मिशन को बीते  बुधवार सायं 4 बजकर 8 मिनट पर लॉन्च करने वाला था, लेकिन इसके प्रोपल्शन सिस्टम में आई विसंगति का समय रहते पता चलने के कारण इसके प्रक्षेपण को एक दिन के लिए टाल दिया गया था।

Due to an anomaly detected in PROBA-3 spacecraft PSLV-C59/PROBA-3 launch rescheduled to tomorrow at 16:12 hours.


इन उपग्रहों को भारत के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-XL लॉन्चर के माध्यम से "स्टैक कॉन्फ़िगरेशन" में एक साथ ESA के प्रोबा-3 उपग्रहों को उच्च अण्डाकार कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। 


लॉन्चर से अलग होने के लगभग तुरंत बाद इसने ऑस्ट्रेलिया में "यथारग्गा"स्थित स्पेस स्टेशन ने इससे संकेत प्राप्त करना शुरू कर दिया। टेलीमेट्री संबंधित आंकड़े बेल्जियम में ईएसए के मिशन नियंत्रण केंद्र में प्राप्त होना शुरू हो गया है। 




इसरो ने यह उड़ान अपनी वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और ईएसए के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें PSLV-C59/PROBA-3, जो ISRO,NSIL और ESA का सहयोग है।

PSLV-C59/Proba-3 Mission - Liftoff, PSOM Separation, Stage Ignition & Satellite Separation Video


प्रोबा, जो 'ऑनबोर्ड एनाटॉमी के लिए परियोजना' को संदर्भित करता है, का लैटिन में अर्थ "आओ प्रयास करें" भी है, जो इसरो और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बीच नए सहयोग के लिए एक उपयुक्त शब्द है।


प्रोबा-3 मिशन के जरिए वैज्ञानिक सूर्य के अंदरूनी और बाहरी कोरोना के बीच बने काले घेरे का। अध्ययन करेंगे। 


सूर्य के कोरोना का तापमान 20 लाख डिग्री फेरनहाइट तक जाता है। सालाना उठने वाले सोलर फ्लेयर्स की चपेट में आकर अंतरिक्ष  में उपग्रह संचार, नौवहन प्रणाली और पृथ्वी पर पावर ग्रिडों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। ये सौर तूफान मुख्य रूप से सूर्य के कोरोना के कारण से ही उत्पन्न होते हैं, जो सूर्य की सतह से कहीं ज़्यादा गर्म है।


सूर्य का कोरोना सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी हिस्सा है। कोरोना आमतौर पर सूर्य की सतह की चमकदार रोशनी से छिपा रहता है। इसलिए विशेष उपकरणों का उपयोग किए बिना इसे देखना मुश्किल होता है। हालाँकि, कोरोना को पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जा सकता है ।


पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। जब ऐसा होता है, तो चंद्रमा सूर्य की चमकदार रोशनी को रोक लेता है। तब ग्रहणग्रस्त सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ सफ़ेद कोरोना देखा जा सकता है।


वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना, सूर्य से भी ज्यादा गर्म है और यहीं से अंतरिक्षीय वातावरण की उत्पत्ति होती है।


प्रोबा-3 मिशन, इसरो के क्रमशः 2001 और 2009 में प्रक्षेपित प्रोबा-1 और प्रोबा-2 पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की अगली कड़ी के रूप में आया है।


PROBA-3 मिशन वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम के बारे में हमारे ज्ञान को और बेहतर बनाएगा और इन सौर प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।


प्रोबा-3 (प्रोजेक्ट फॉर ऑनबोर्ड ऑटोनोमी) में दो उपग्रह हैं, जिनमें 2 अंतरिक्ष यानो ने एक साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी।


इस मिशन का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रदर्शन करना है।


PROBA-3 ESA का और दुनिया का पहला सटीक "फॉर्मेशन फ्लाइंग" मिशन है।

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य 

दो अंतरिक्ष यानों को एक निश्चित संरचना में "बड़े कठोर ढांचे" की तरह उड़ाने का परीक्षण और प्रदर्शन करने में उसकी सहायता प्रदान करेगा ।


 ESA का लक्ष्य उन तकनीकों को भी प्रमाणन करना है ताकि भविष्य में फॉर्मेशन फ्लाइंग जैसी तकनीकों को और उपयोग में लाया जा सके।


इन दोनो उपग्रहों के  सूर्य के बाहरी कोरोना या सौर किरीट के कमजोर हिस्सों का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा, खासतौर पर सौर रिम के पास। यह इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य है। 


Proba 3 एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन है जिसे जनरल सपोर्ट टेक्नोलॉजी प्रोग्राम(GSTP) के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है।


मिशन का प्रक्षेपण: इस मिशन का नेतृत्व यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) कर रही है, जिसे दिसंबर 2024 में लॉन्च किया जाना है, इस मिशन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-XL रॉकेट द्वारा किया गया।



मिशन का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सूर्य के कोरोना के अभूतपूर्व अवलोकन को सक्षम करते हुए सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग का प्रदर्शन करना है।


घटक: प्रोबा-3 मिशन में दो छोटे उपग्रह कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान (Coronagraph Spacecraft) और ऑकुल्टर अंतरिक्ष यान (Occulter Spacecraft) शामिल हैं।


इस मिशन का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रदर्शन करना है।

PROBA-3 ESA का और दुनिया का पहला सटीक "फॉर्मेशन फ्लाइंग" मिशन है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य 

दो अंतरिक्ष यानों को एक निश्चित संरचना में "बड़े कठोर ढांचे" की तरह उड़ाने का परीक्षण और प्रदर्शन करने में उसकी सहायता प्रदान करेगा ।


 ESA का लक्ष्य उन तकनीकों को भी प्रमाणन करना है ताकि भविष्य में फॉर्मेशन फ्लाइंग जैसी तकनीकों को और उपयोग में लाया जा सके।


इन दोनो उपग्रहों के  सूर्य के बाहरी कोरोना या सौर किरीट के कमजोर हिस्सों का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा, खासतौर पर सौर रिम के पास। यह इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य है। 


Proba 3 एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन है जिसे जनरल सपोर्ट टेक्नोलॉजी प्रोग्राम(GSTP) के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है.


प्रोबा-3 मिशन में दो उपग्रह शामिल हैं: 


1. कोरोनाग्राफ अंतरिक्षयान :सोलर कोरोनाग्राफ़ एक ऑप्टिकल उपकरण है जो एक ऑकल्टिंग डिस्क के ज़रिए कृत्रिम अंधेरे ग्रहण की स्थितियों को पुन: पेश करता है।

इसका वजन 340 किलोग्राम है। उच्च स्तरीय परिष्कृत उपकरणों से लैस,यह अंतरिक्ष यान कोरोना की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें लेगा, जिससे वैज्ञानिकों को इसकी जटिल संरचनाओं, गतिशीलता और सौर विस्फोटों जैसे कि: कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejections-CME) को संचालित कर प्रक्रियाओं का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।


---- कोरोनाग्राफ सूरज की दिशा में खड़ा होगा और लेजर और विजुअल बेस्ड टारगेट को निर्धारित करेगा जिसमें ASPIICS यानी एसोसिएशन ऑफ स्पेसक्राफ्ट फॉर पोलैरीमेट्रिक और इमेंजिंग इन्वेस्टिंगेशन ऑफ कोरोना ऑफ द सन को माउंट किया गया है।


 ----इसके अलावा इसमें 3DEES यानी 3डी इनरजेटिक इलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर भी लगाया गया है जो सूर्य के बाहरी और अंदरूनी कोरोना के बीच के गैप का अध्ययन करेगा।



महत्त्व: कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान कोरोना का विस्तार से निरीक्षण करके वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम के पीछे के तंत्र को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा, जिसका पृथ्वी की तकनीक और बुनियादी ढाँचे पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।



2.ओक्ल्टर अंतरिक्षयान  240 किलोग्राम वजनी,प्रोबा-3 एक डिस्क के आकार वाला ,जिसे कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान के लिए सूर्य को ब्लॉक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह स्पेसक्राफ्ट कोरोनाग्राफ के ठीक पीछे रहेगा,जैसे ग्रहण में सूरज के सामने चंद्रमा और उसके पीछे धरती रहती है । इसमें लगाया गए DARA यानी डिजिटल एब्सोल्यूट रेडियोमीटर साइंस एक्सपेरीमेंट इंस्ट्रूमेंट कोरोना से मिलने वाले आकंड़े ,सोलर हवाओं और कोरोनल मास इजेक्शन का अध्ययन करेगा।

इस उपग्रह की मदद से वैज्ञानिक अंतरिक्ष के मौसम और सौर हवाओं के रुख और स्वभाव की जांच पड़ताल कर सकेंगे जिससे यह पता चल सके की  सूर्य का सोलर डायनेमिक्स क्या है? इसका हमारी धरती पर क्या असर होता है?


कोरोना के उच्च-रिजॉल्यूशन अवलोकन को सक्षम करने में ऑकल्टर अंतरिक्ष यान की महत्त्वपूर्ण भूमिका से वैज्ञानिकों को सौर भौतिकी और अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में भी अपना महती योगदान देगी।


ऑकुल्टर’ अंतरिक्ष यान सूर्य की सौर डिस्क को अवरुद्ध कर 

एक ग्रहण जैसी घटना उत्पन्न करेगा,

जिससे ‘कोरोनाग्राफ’ को वैज्ञानिक अवलोकन के लिए सूर्य के कोरोना या आसपास के वातावरण का अध्ययन करने में वैज्ञानिकों को और बेहतर समझ और मदद मिलेगी,जो अंतरिक्ष के मौसम को नियंत्रित करता है। जहां एक उपग्रह सूर्य के चमकते हिस्से को अवरुद्ध करेगा,वहीं दूसरा जिससे दूसरे को सूर्य के बाहरी वातावरण या 'कोरोना' का विस्तारित अध्ययन करने में मदद मिलेगी।


सालाना उठने वाले सोलर फ्लेयर्स की चपेट में आकर अंतरिक्ष  में उपग्रह संचार, नौवहन प्रणाली और पृथ्वी पर पावर ग्रिडों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। ये सौर तूफान मुख्य रूप से सूर्य के कोरोना के कारण से ही उत्पन्न होते हैं, जो सूर्य की सतह से कहीं ज़्यादा गर्म है।

PROBA-3 मिशन वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम के बारे में हमारे ज्ञान को और बेहतर बनाएगा और इन सौर प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।


 प्रोबा-3 मिशन, इसरो के क्रमशः 2001 और 2009 में प्रक्षेपित प्रोबा-1 और प्रोबा-2 पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की अगली कड़ी के रूप में आया है।


सूरज के चारों तरफ मौजूद एक विशाल गैप का अध्ययन करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी ।


ये दोनों उपग्रह एकसाथ एक रेखीय समरूप 150 मीटर की दूरी पर पृथ्वी का घूर्णन करते  हुए सूर्य के बाह्यतम भाग का अध्ययन करेंगे।

सूर्य के बाह्यतम भाग को अगर सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जाए तो आप यहां पर दो तरह के कोरोना को देख सकते हैं।


जिसे तकनीकी तौर पर हाई कोरोना और लो कोरोना कहा जाता है, जिसका फिलहाल कई उपग्रह इसका अध्ययन कर रहे हैं लेकिन इनके बीच के गैप का अध्ययन यानी उस काले हिस्से की समुचित जांच पड़ताल प्रोबा-03 करेगा।

प्रोबा-03 में लगा ASPIICS इंस्ट्रूमेंट की वजह से इस काले गैप का अध्ययन आसान हो जाएगा।


PROBA-3 उपग्रह पर मौजूद कोरोनाग्राफ को ASPIICS कहा जाता है, जिसे  बेल्जियम, चेक गणराज्य, ग्रीस, इटली, आयरलैंड, पोलैंड और रोमानिया के यूरोपीय संस्थानों और अंतरिक्ष उद्योगों के एक समूह द्वारा विकसित किया गया है। ASPIICS का अभूतपूर्व दृश्य क्षेत्र इसे सौर कोरोना के अध्ययन के लिए अद्वितीय बनाता है, क्योंकि यह सौर EUV इमेजर्स और पारंपरिक अंतरिक्ष कोरोनाग्राफ के दृश्य क्षेत्रों के बीच के महत्वपूर्ण अवलोकनीय अंतर को समाप्त करने में संभवतः सक्षम हो सकेगा






 प्रोबा-3 यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का एक सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग मिशन है, जो कक्षा में दो उपग्रहों को इस तरह संरेखित करता है कि सूर्य के सामान्य रूप से अदृश्य सौर कोरोना का भी विस्तारित दृश्यता प्राप्त  किया जा सके। इनका परीक्षण  बेल्जियम के रेडवायर में प्री-फ्लाइट परीक्षण में किया गया है।


यह  "डुअल-सैटेलाइट"अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी Proba परिवार के मिशनों में से एक है। दोनों उपग्रह एक साथ एकजुट होकर उड़ान भरी और उनकी स्थिति मिलीमीटर के हिस्से वाले भाग तक सटीक रहेगी।इस प्रक्षेपण में दो उपग्रह, कोरोनाग्राफ और ऑकुल्टर,एक दूसरे से महज 150 मीटर की दूरी पर एक साथ यात्रा कर रहे हैं,जो अपने आप एक अनूठी वैज्ञानिक उपलब्धि है ।


इन उपग्रहों पर लगे उपकरण सौर परिधि की एक बार में लगभग छह घंटे यात्रा करेंगे और प्रत्येक अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में 19.7 घंटे की परिक्रमा करेगा इसमें 60,530 किमी का हाई अर्थ ऑर्बिट यानि अप भू: (पृथ्वी से सबसे दूरस्थ बिंदु) और 600 किमी का उप भू:(पृथ्वी से सबसे निकटतम बिंदु) होगा।




पीएसएलवी ही क्यों: इसरो ने संभवतः PSLV को इसकी अतिउत्कृष्ट सफलता दर और न्यून विफलता दर के कारण चुना गया है।पीएसएलवी इसरो का चार चरणों वाला प्रमोचन यान है, जिसे सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun Synchronus Orbit) और भू-स्थानांतरण कक्षा (Ground Transfer Orbit) में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके शानदार प्रदर्शन पर गौर करें तो हम पाते हैं कि यह ठोस और तरल प्रणोदन चरणों का उपयोग करता है जो इसे अत्यधिक विश्वसनीय और सफल मिशनों का साबित ट्रैक रिकॉर्ड है जो एक साथ कई उपग्रहों को लॉन्च करने में सक्षम है।

इसके माध्यम से अब तक किए गए 60 प्रक्षेपण में से  57 सफल रहे हैं, जिससे यह छोटे और मध्यम पे लोड/उपग्रहों के लिए राइड शेयर सेवाओं का प्रमुख प्रदाता बन गया है।






कोरोनल मास इजेक्शन :(Coronal Mass Ejections-CME) :.


*CME सूर्य के कोरोना से अंतरिक्ष में प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्रों का बड़े पैमाने पर उत्सर्जन है।

कारण: वे सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों के अचानक पुनर्गठन से ट्रिगर होते हैं, जिससे ऊर्जा का विस्फोटक उत्सर्जन होता है।


आवृत्ति : CME सूर्य के सौर चक्र के चरम के दौरान अधिक बार होते हैं।,एक  सौर चक्र लगभग 11-वर्षीय होता है।


विशेषताएँ: CME में अरबों टन आवेशित कण (प्लाज्मा) अपने में समावेशित किए होते हैं, जो सैकड़ों से लेकर हजारों किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा करते हैं।



पृथ्वी पर प्रभाव।


उपग्रह व्यवधान: CME उपग्रह इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार,दूरसंचार प्रणालियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं और GPS तथा संचार प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं।


भू-चुंबकीय तूफान: CME भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न कर सकते हैं, जो क्रिटिकल अवसंरचना जैसे  बिजली ग्रिड और रेडियो और उपग्रह आधारित टेलीविजन संचार प्रणालियों को को बाधित करते हैं।

Solar Storm Impact on the Solar System arguably more so every other planet than earth.


ऑरोरा: CME ऑरोरा को तीव्र करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ध्रुवों के पास शानदार दिखने वाले रंग बिरंगे प्रकाश का दीदार  होते है।


प्रोबा-3 मिशन के उद्देश्य की बात करें तो इसे भविष्य के मल्टी-सैटेलाइट कॉन्फ़िगरेशन मिशनों के लिए दो उपग्रहों की सटीक संयुक्त उड़ान को सफलतापूर्वक प्रदर्शित करने योग्य बनाया गया है।




आगे की राह

इस अभियान के जरिए वैज्ञानिक एक लंबे समय से चले आ रहे इस सोलर कोरोना के अबूझ रहस्य को सुलझाना है जैसे सौर कोरोना सूर्य से भी अधिक गर्म क्यों है? 

यह सूर्य की सतह के बहुत करीब होने वाली संरचना, गतिशीलता और तापन प्रक्रिया का अवलोकन करना। 

यह सूर्य और उसके वायुमंडल के बीच की अंतःक्रिया के बारे में हमारी समझ को और परिष्कृत करेगा।


ASPIICS (Association of Spacecraft for Polarimetry and Imaging Investigation of the Corona of the Sun) कोरोनल मास इजेक्शन (CME) का अध्ययन करने में भी सक्षम बनाएगा। सूर्य की ओर गर्म पदार्थ के ये विशाल इजेक्शन अंतरिक्ष के मौसम को कैसे नियंत्रित करते हैं और क्या पृथ्वी तक इनका नगण्य प्रभाव हो सकता है?

 इसे एक वैज्ञानिक श्रेणी के उपकरण के रूप में विकसित किया गया है जो पृथ्वी के विकिरण बेल्ट में इलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रा को भी मापेगा।







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