क्वांटम तकनीक और इससे संबंधित प्रौद्योगिकियां और उसके अनुप्रयोग 21वीं सदी की सबसे रोमांचकारी और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों में से हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर विकसित हो रहे इस तकनीक के सिद्धांतों से कई व्यावसायिक और व्यावहारिक अनुप्रयोग सामने आएंगे।
क्वांटम प्रौद्योगिकी मुख्यतः क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों पर आधारित है। यह भौतिकी और इंजीनियरिंग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है।यह तकनीक वर्तमान में मौजूद तमाम तकनीक और प्रौद्योगिकियों के दशा और दिशा में क्रन्तिकारी परिवर्तन लाते हुए इसे पूरी तरह आमूल चूल परिवर्तन लाने में सक्षम है। इसलिए ही कहा जा रहा है कि आने वाला वक़्त दुरूह तकनीक वाले क्वांटम प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोगों का है,और इस क्षेत्र में महारत हासिल करने वाले देश विश्व पटल पर अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
संभवतः इसी कारण से भारत सरकार ने वर्ष 2019 में क्वांटम प्रौद्योगिकी को "राष्ट्रीय महत्व के मिशन (Mission of National Importance) का दर्जा प्रदान किया था। इसके परिणामस्वरूप, इसके प्रासंगिक कोर और एप्लाइड रिसर्च में अत्यधिक सार्वजनिक व निजी निवेश किया जा रहा है ।
इसी कड़ी में बीते बुधवार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। इस तरह भारत एक मिशन मोड रूप में क्वांटम तकनीक के विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध कार्यक्रम घोषित करने वाला सातवां देश बन गया है। अमेरिका, चीन, कनाडा,ऑस्ट्रिया,फिनलैंड और फ्रांस इस प्रकार के तकनीकी श्रेष्ठता लेने की पहल को शुरू कर चुके हैं।
क्वांटम प्रौद्योगिकी और इसके भविष्ययोमुखी अनुप्रयोग,इसकी अहम भूमिका आदि को देखते हुए हम समझते है इसके मौलिक अवयवों को.
1.क्वांटम प्रौद्योगिकी क्या है।
2.इससे संबंधित वैज्ञानिक सिद्धांत क्या हैं?
3.क्वांटम प्रौद्योगिक को कैसे परिवर्तित कर सकते हैं?
इसके अलावा, हम इस तथ्य की भी करना सबसे ज़रूरी क्यों है? क्वांटम उद्योग को मजबूत करने के लिए उपयोग से जुड़ी चुनौतियां क्या हैं? ऐसा क्या किया जाना चाहिए हम इन सवालों के जवाब ढूंढने का प्रयास करेंगे।
1.आमतौर पर भौतिकी और रसायन शास्त्र विज्ञान के विद्यार्थी को क्वांटम भौतिकी/मेकेनिक्स की अवधारणाओं (Postulate) कंठस्थ होने की उम्मीद की जाती है,चूंकि मैंने खुद स्नातक के अंतिम और परास्नातक के दोनों वर्षो में इस जटिल विषय को पढ़ा, समझा इसलिए आसान तरीकों से आम लोगों को इसकी खूबियां समझाना चाहता हूँ.
क्वांटम सिद्धांत जिसे क्वांटम भौतिकी या क्वांटम यांत्रिकी के रूप में भी जाना जाता है, आधुनिक भौतिक विज्ञान का मूलभूत आधार है। आधुनिक भौतिकी में, "क्वांटम" किसी भी भौतिक गुण /फिज़िकल प्रॉपर्टी की अतिसूक्ष्म और संभवतः असतत (discrete) इकाई है जो आमतौर पर एटॉमिक या सब एटॉमिक कणों के गुणों को संदर्भित करता है जैसे- इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रिनो और फोटॉन आदि।
आम तौर पर क्लासिकल फिजिक्स का उपयोग अक्सर मैक्रोस्कोपिक स्तर पर होने वाली घटनाओं की व्याख्या करने के लिए किया जाता है। जबकि क्वांटम सिद्धांत चीजों को और आगे ले जाता है और उप-परमाणु स्तर पर होने वाली घटनाओं की व्याख्या करता है।सामान्य सापेक्षता के साथ क्वांटम सिद्धांत भौतिकी के व्यापक और महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जो दुनिया को देखने का एक नया तरीका और नजरिया प्रदान करते हैं।
आज क्वांटम थ्योरी के सिद्धांतों को कई क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। क्वांटम यांत्रिकी का उपयोग ब्रह्मांड की विभिन्न विशेषताओं की व्याख्या करने के साथ-साथ उप-परमाणु कणों जैसे प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन, फोटॉन और अन्य के व्यक्तिगत व्यवहार को प्रकट करने के लिए किया जाता है। क्वांटम मेकेनिक्स रासायनिक बंधन प्रक्रियाओं में मात्रात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है और आधुनिक कम्प्यूटेशनल रसायन विज्ञान में की जाने वाली अधिकांश गणना क्वांटम मेकेनिक्स पर आधारित होती है।
क्वांटम सिद्धांत के कुछ अन्य अनुप्रयोग में पाए जाते हैं
क्वांटम प्रकाशिकी,क्वांटम कम्प्यूटिंग,प्रकाश उत्सर्जक डायोड,सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट,ऑप्टिकल एम्पलीफायर और लेजर,ट्रांजिस्टर,अर्धचालक,चुम्बकीय अनुनाद इमेजिंग(MRI),इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और बहुत कुछ।
क्वांटम भौतिकी /मेकेनिक्स के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसे आसानी से समझाया नहीं जा सकता है, क्योंकि ये "क्वांटम ऑब्जेक्ट" एक समय में एक साथ कई अवस्थाओं व स्थानों में अस्तित्व में हो सकते हैं।
बेहद अनिश्चितता व विरोधाभासों से भरे क्वांटम सिद्धांत की सबसे खास बात यह है कि यह "ऑब्जेक्टिव रियेलिटी" के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा करता/ उठाता है, इसलिये वैज्ञानिक समुदाय में भी इसके सिद्धांत की काफी आलोचना होती रही है। यह इतना जटिल है कि आइजक न्यूटन के बाद के महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को भी क्वांटम सिद्धांत को समझने और इसे स्वीकार करने में काफी परेशानी हुई थी जिसके बाद उन्होंने इस सिद्धांत को लेकर यहाँ तक कह दिया कि "God Does not play Dice with the universe"…शायद इसकी जटिलता को देखते हुए प्रसिद्ध भौतिकविद रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन ने कहा था कि "If you think you understand quantum mechanics, you don’t understand quantum mechanics."
2.क्वांटम यांत्रिकी का गणित : क्वांटम यांत्रिकी का अध्ययन 'हिल्बर्ट स्पेस" में किया जाता है। डिराक संकेतन(Dirac Notation) क्वांटम यांत्रिकी का गणितीय प्रस्तुतीकरण है। इसको ब्रा-केट नोटेशन (Bra–ket notation) भी कहते है।
प्रत्येक क्वांटम मैकेनिकल सिस्टम की स्थिति को एक फलन(फंक्शन)Ψ(r, t) से वर्णित किया जायेगा।
जहाँ r उस कण का निर्देशांक और t समय है।
क्लासिकल मेकेनिक्स में स्थिति(Position),संवेग, गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, कोणीय संवेग इत्यादि को हम Observable कहते है। क्लासिकल मेकेनिक्स के प्रत्येक observable के लिए क्वांटम मेकेनिक्स में एक रैखिक हर्मिशियन ऑपरेटर होता है। यह एक दुरूह गणितीय गणना होता जिसमे Psi(Ψ) समय का एक फंक्शन है और श्रोडिंजर समीकरण की सहायता से इसकी गणना की जाती है कि यह समय अनुसार कैसे बदलता है।
क्वांटम भौतिकी में श्रोडिंजर समीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण Differential समीकरण है। इन्हे एक-आयाम(1-D) और त्रि-आयाम(3-D ) में सॉल्व किया जाता है और यह "Probability डेंसिटी मतलब प्रायिकता घनत्व से सम्बंधित होती है।जब आप किसी कण का अवलोकन (ऑब्जरवेशन) कर लेते हो तब वेव फंक्शन कोलेप्स हो जाता है और वह अपने आप की स्थिति बता देता है। जब तक आप यह ऑब्जरवेशन नहीं करते है तब तक कण क्वांटम सुपरपोज़िशन में रहता है,मतलब कोई भी गुण संभव है।
क्वांटम कण का आशयऐसे सूक्ष्म कणों (जैसे फोटॉन, इलेक्ट्रॉन आदि) का व्यवहार सामान्यतः नग्न आँखों से दिखाई देने वाली वस्तुओं के व्यवहार से काफी अलग होता है ।
क्वांटम तकनीक के जटिल गुत्थी को हमारे वैज्ञानिक और तकनीकीविद समय के साथ सुलझा रहे है।
इस मिशन के कार्यान्वयन से क्वांटम कंप्यूटर,अवरोध मुक्त सुरक्षित संचार व्यवस्था,क्वांटम एन्क्रिप्शन,एनक्रिप्ट-विश्लेषण और इससे संबंधित तकनीकें विकसित लगातार विकसित कर रहे है।
इसी कड़ी में यहाँ यह समझना आवश्यक है कि आखिर यह तकनीक कार्य कैसे करती है
मौलिक तौर पर क्वांटम यांत्रिकी के दो बुनियादी सिद्धांत हैं: क्वांटम एंटेंगलमेंट व क्वांटम सुपरपोजिशन।
क्वाटम सुपरपोजिशन सिद्धांत का मानना है कि उप-परमाण्विक कण एक साथ कई दशाओं में मौजूद होते है । इसका आशय यह है कि प्रत्येक क्यूबिट एक ही समय में 1 और 0 दोनों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। दूसरे शब्दों में यह अंतिम मापन से पहले समान अवधि में क्वांटम कणों के कई अवस्थाओं में होने की क्षमता है, अर्थात् माप या अंतिम आकलन से पहले तक क्वांटम सुपरपोज़िशन में होते हैं।
एंटेंगलमेंट: इसका अर्थ यह है कि सुपरपोज़िशन में क्यूबिट को एक दूसरे के साथ सहसंबद्ध (correlated) किया जा सकता है, अर्थात एक की स्थिति (चाहे वह 1 हो या 0 हो) दूसरे की स्थिति पर निर्भर हो सकती है। यह बाइनरी या बूलियन बीजगणित से एकदम अलग है
क्वांटम तकनीक का अनुप्रयोग कण भौतिकी/पार्टिकल फिजिक्स से नक्षत्र विज्ञान तक क्वांटम यांत्रिकी का शानदार उपयोग हुआ है। सामान्य रूप से में इसके गणितीय पक्ष की जटिलता इसकी खूबसूरती बढ़ाता है इसके सिद्धांतो से प्रभावित इंजीनियरिंग ने हमारे जीवन को आधुनिक,सरल और रोचक बना दिया है।
भारत में क्वांटम क्रांति को सुगम बनाने के लिए और क्या किए जाने की आवश्यकता है जिसके लिए मे महत्वपूर्ण है
एक समर्पित क्वांटम समुदाय का निर्माण,अनुसंधान और विकास के लिए समर्पित संस्थान,
क्वांटम तकनीकी आधारित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाना, राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित करना,केंद्र और राज्य सरकारों के हितधारकों बीच प्रभावी समन्वय,अनुसंधान को वैश्विक मंचो के अनुकूल अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करना आदि शामिल है
इसी कड़ी में देश में क्वांटम तकनीक आधारितऔद्योगिक अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिये विभिन्न उपाय किये हैं केंद्र सरकार 2026 तक लगभग 50 क्यूबिट्स युक्त एक क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने की योजना पर विचार कर रही है। हालांकि इस कार्य को पूरा करने और क्षेत्र में समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं जैसे-
क्वांटम टेक्नोलॉजी और एप्लीकेशन पर राष्ट्रीय मिशन (NMQTA): वर्ष 2020 के बजट भाषण में इस मिशन की घोषणा की गई थी। इसे 8,000 करोड़ रुपये के कुल बजट परिव्यय (Budget outlay) के साथ पांच वर्ष की अवधि के लिए शुरू किया गया । इसका कार्यान्वयन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जाएगा। इसका उद्देश्य अत्यधिक सुरक्षित क्वांटम संचार, क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन ( OKD), क्वांटम घड़ियों, सेंसर, इमेजिंग उपकरणों और स्टार्टअप सहयोग के साथ क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान की सुविधा के लिए कई प्रयोगशालाएं और केंद्र स्थापित किए गए हैं। उदाहरण के लिए: भारतीय सेना ने महू, मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय द्वारा समर्थित एक सैन्य इंजीनियरिंग संस्थान में क्वांटम कंप्यूटिंग प्रयोगशाला और एआई (AI) केंद्र स्थापित किया है।
> डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी (DIAT) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC) ने क्वांटम कंप्यूटरों के सहयोग और विकास के लिए अपनी सहमति प्रदान की है ।
> DST और IISER पुणे के लगभग 13 अनुसंधान समूहों ने क्वांटम प्रौद्योगिकी के विकास को आगे बढ़ाने के लिए आई -हब क्वांटम टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (I HUB QTF) का शुभारंभ किया है।
> क्वांटम कंप्यूटिंग आधारित अनुसंधान और विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के सहयोग से एक "क्वांटम कंप्यूटिंग एप्लीकेशन लैब " की स्थापना की है।
बेंगलुरु अवस्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ भागीदारी प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए पहल शुरू की हैं। इसका उद्देश्य इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए जाने वाले उपग्रहों हेतु आवश्यक क्वांटम प्रौद्योगिकियों का विकास करना है ।
क्वांटम सक्षम विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Quantum Enabled Science and Technology QuEST) पहलः बुनियादी ढांचे को तैयार करने और क्षेत्र में अनुसंधान को सुविधाजनक बनाने के लिए 80 करोड़ रुपये के निवेश के साथ इसे DST द्वारा लॉन्च किया गया था।
प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) द्वारा शुरू किए गए क्वांटम फ्रंटियर मिशन का उद्देश्य क्वांटम मैकेनिकल प्रणाली के प्रति समझ विकसित करना और इस दिशा में महारत और दक्षता हासिल करना है।
क्वांटम कंप्यूटर सिम्युलेटर (QSim) टूल किट इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और छात्रों को "क्वांटम कोड" विकसित करने और उसे डी-बग करने हेतु अवसर प्रदान करना था। क्वांटम कोड को "क्वांटम एल्गोरिदम" को विकसित करने और लागत प्रभावी तरीके से क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
उपरोक्त नीतिगत फैसलों और अपने समर्पित प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत ने निम्नलिखित उपलब्धियां प्राप्त करने में सफल रहा है:
DRDO और IIT दिल्ली के वैज्ञानिकों की एक टीम ने प्रयागराज और विंध्याचल( उत्तर प्रदेश ) के बीच (100 किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र में "क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन" (Quantum Key Distribution ) लिंक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। जबकि इसरो ने 300 मीटर की दूरी से मुक्त अंतरिक्ष क्वांटम संचार (free-space Quantum Communication) का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है।
इसी कड़ी में मुंबई अवस्थित DRDO की यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी फॉर क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ (DYSL-QT) ने "क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर" को सफलतापूर्वक विकसित किया है।
क्यों क्वांटम तकनीक के अनुप्रयोगों से दुनिया में बदलाव की उम्मीद की जा सकती है.
क्वांटम प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रगत अनुप्रयोगों की परिकल्पना की गई है। इनका मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव के साथ आधुनिक प्रौद्योगिकियों में आमूलचूल परिवर्तन लाना है।
इन अनुप्रयोग से ज़्यादातर प्रभाव, मानव संबंधित गतिविधियों को बढ़ाने और इनकी क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, हालांकि निश्चित रूप से इनके कुछ संभावित जोखिम भी मौजूद हैं।
क्वांटम प्रौद्योगिकी मानव जाति के लिए कैसे लाभदायक हो सकती है ?
1.जटिल समस्याओं का समाधानः क्वांटम कंप्यूटर, आधुनिक समय के कंप्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमताओं में असाधारण वृद्धि करने में सक्षम हैं, जो जटिल और दुरूह गणना करने में मदद करेंगें। इससे वे बड़े डेटा सेट का अधिक सटीक विश्लेषण कर सकेंगे और अंततः जटिल समस्याओं को हल कर सकेंगे। साथ ही यह कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खोजों को बढ़ावा देगा जैसे-
> मशीन लर्निंग (ML)और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): Al समाधानों को बेहतर बनाने के लिए तीव्र मशीन लर्निंग की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जा सकता है।
> वित्तीय सेवाएं: यह वित्तीय पूर्वानुमान,गहन विश्लेषण, व्यापार को तीव्र बनाने,एक्चुरियल प्रबंधन,अधिक सटीक जोखिम आकलन,अति- सुरक्षित लेनदेन आदि में सुधार कर सकता है।
> मौसम पूर्वानुमानः मौसम प्रणाली की मॉडलिंग को बेहतर बनाकर वैज्ञानिक बदलते मौसम के पैटर्न की कुछ ही समय में और सटीक भविष्यवाणी कर सकते हैं।
> लॉजिस्टिक्सः यह बेहतर डेटा विश्लेषण और मजबूत मॉडलिंग को सुनिश्चित कर सकता है। इससे लॉजिस्टिक्स का उपयुक्त प्रयोग करना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (ScM)से जुड़े कार्यों की शेड्यूलिंग करना भी आसान हो जाएगा। इन कार्यों में यातायात प्रबंधन,नौसैनिक बेड़े का संचालन, हवाई यातायात नियंत्रण, माल ढुलाई एवं वितरण इत्यादि शामिल हैं।
> ऊर्जाः इनसे लार्ज-ग्रिड डेटा ऑप्टिमाइजेशन (LGDO)से संबंधित मुद्दों को आसानी से हल किया जा सकता है। साथ ही "हाई फिडेलिटी" (HiFi) और ऐसी ही अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा सकती हैं।
> वैज्ञानिक अनुसंधानः गणित,भौतिकी,रसायन विज्ञान आदि जैसे क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान प्राप्त करना आसान हो जाएगा। विशेषकर ऐसी समस्याओं का जिनकी जटिलता के कारण पारंपरिक कंप्यूटर उन्हें हल नहीं कर पाते हैं। अतः क्वांटम प्रौद्योगिकी से विज्ञान में नई खोजों को बढ़ावा मिल सकता है।
> अनस्ट्रक्चर्ड डेटा सर्चेज़ का बिग डेटा एनालिसिस, अतिचालकों (superconductors) का विकास, फार्माकोग्नोसी,औषधि अनुसंधान, विमान, एकल और बहु चरणीय ईंधन वाले प्रक्षेपाशस्त्र और इनके मुखाशास्त्र, इमारतों, कारों आदि के नवोन्मेषी डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है क्वांटम प्रौद्योगिकी पर महारत हासिल करना.
इसमे कोई संदेह नहीं की क्वांटम तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोग आने वाले दशकों में सर्वाधिक उभरती हुई और क्रन्तिकारी प्रौद्योगिकियों में शुमार होगा।
मशीन लर्निंग, बिग डेटा एनालिटिक्स,आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के विभिन्न अवयवों के साथ मिलकर क्वांटम तकनीक विश्व आर्थिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि इस उभरते हुए क्षेत्र में शुरुआती बढ़त हासिल करने हेतु स्वयं सरकार और उद्योगों दोनों द्वारा उपयुक्त प्रयास करना अनिवार्य हो गया है।
भारत,विज्ञान,प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग विषयों में प्रौद्योगिकी विकास और उच्च शिक्षा को अन्य विकसित देशों के समतुल्य बनाते हुए मानवीय कल्याण वाले अनुसंधानों को बढ़ावा देने के लिए क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा दे सकता है।
देश की आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने में समग्र विकास के एक हिस्से के रूप में भारत मुख्यतः क्वांटम अनुसंधान और विकास, सॉफ्टवेयर विकास एवं उपकरण निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार भी बन सकता है।
नैसकॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार क्वांटम तकनीक से 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 310 अरब डॉलर तक का निवेश हो सकता है।
सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करने के लिए क्वांटम प्रौद्योगिकी वस्तुतः स्वास्थ्य, ऊर्जा, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में एक क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती है।
इससे भारत को अपने जीवन स्तर को बढ़ाने और अपने सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है।अगर बात उद्यमिता और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का अनुसंधान के क्षेत्र से निकलकर दैनिक जीवन से जुड़े अनुप्रयोगों की ओर स्थानांतरण आवश्यक है। यह समय के हिसाब से एक उपयुक्त कदम साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कई स्टार्टअप कंपनियों को बनाने और विकसित करने की दिशा में आवश्यक आधार प्रदान कर सकता है।
क्वांटम तकनीक और जोखिम :
क्वांटम प्रतिरोधी सुरक्षा समाधानों के बिना,गोपनीयता, डेटा प्रबंधन आदि से संबंधित सभी नियमों और कानूनों को बनाए रखना लगभग असंभव हो जाएगा।
पर्यावरणीय जोखिमः क्वांटम कंप्यूटरों के लिए संसाधनों तथा चिप्स का विनिर्माण पर्यावरण के समक्ष कुछ जोखिम पैदा कर सकता है, जैसे- खनन जनित प्रदूषण, अत्यधिक निष्कर्षण इत्यादि ।
एकाधिकारःयहाँ यह तय है कि इस अति विशेषकृत क्वांटम तकनीक और इसके अनुप्रयोग, क्वांटम कंप्यूटरों से जुड़ी उच्च लागत और तकनीकी विशेषज्ञता के कारण केवल कुछ ही गिने-चुने देश हितधारक और अभिकर्ता उन्हें बनाने में सक्षम होंगे।
इसलिए क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर दक्षता प्राप्त देशों में एकाधिकार की भावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है जो इनके "क्वांटम सुप्रीमेसी" की भावना को बलवती करेगी जिसमे नैतिक सरोकार जैसे—मानव डीएनए में हेरफेर करना,बिना अधिकार के प्रवेश करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास, लाभों और अनुप्रयोगों तक विकासशील देशों की असमान पहुंच को बढ़ावा इत्यादि भी इसमें शामिल हैं।
इसके अलावा,किसी विशेष समूह को भू-सामरिक / रणनीतिक या प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करने वाले अनुप्रयोगों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
क्वांटम प्रौद्योगिकी की परिकल्पना विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक और नवीन प्रगति लाने के लिए की गई है। इन क्षेत्रों में चिकित्सा, वित्त, ऊर्जा, परिवहन, संचार, आपदा प्रबंधन और यहां तक कि जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र शामिल है साथ ही इसके लिए जरुरी हैं की इसको "क्वांटम एथिक्स " के दायरे मे लाते हुए शोध और विकास कार्य किये जाए जिससे इसके जोखिमपूर्ण उपयोग से संबंधित खतरे को न्यून किया जा सके हैं।
क्वांटम सुप्रीमेसी/वर्चस्व :इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कैलिफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जॉन प्रेस्किल द्वारा 2012 में किया गया था। उनके अनुसार क्वांटम कंप्यूटर किसी भी ऐसी गणना को कर सकता है जिसे आधुनिक सुपर कंप्यूटर करने में सक्षम नहीं है।
उदाहरण :गूगल ने साइकामोर नामक एक क्वांटम प्रोसेसर (Cycamore Quantum Processor) की सहायता से एक गणना को 200 सेकंड में हल कर दिया जिसे आधुनिक समय के एक सुपर कंप्यूटर से हल करने में 10,000 वर्ष का समय लगता।
क्वांटम मेकेनिक्स‘ में शोध के लिए वर्ष 2022 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार.
क्वांटम मैकेनिक्स में शोध के लिए वर्ष 2022 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को तीन वैज्ञानिकों एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन ज़िलिंगर को दिया गया ।
इन्हें क्वांटम कणों के “एन्टेन्गलिंग” (Entangling) व्यवहार पर उनके द्वारा किए गए शोध के लिए पुरस्कृत किया गया है।
क्वांटम एंटेंगलमेंट एक ऐसी परिघटना है, जो दर्शाती है कि कैसे दो उप-परमाण्विक कण अरबों प्रकाश-वर्ष दूर होने के बावजूद भी एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं।
इस सिद्धांत के अनुसार, एक-दूसरे से इतने अधिक दूर रहने के बावजूद भी एक में आया परिवर्तन दूसरे को प्रभावित करेगा।
क्वांटम तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा.
राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए: क्वांटम कंप्यूटरों का प्रतिकूल उपयोग संभवतः मौजूदा एन्क्रिप्शन को खतरे में डाल सकता है। यह देश के महत्वपूर्ण साइबर बुनियादी ढांचे, वित्तीय और निजी डेटा और गोपनीय सैन्य और रणनीतिक सूचनाओं को जोखिमपूर्ण बना सकता है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा बाधित हो सकती है।
चीन से संभावित खतरों के आलोक में चीन में शोधकर्ताओं ने पहले ही क्वांटम सुप्रीमेसी हासिल करने का दावा किया है। चीन ने एक 15- यूज़र क्वांटम सिक्योर डायरेक्ट कम्युनिकेशन नेटवर्क का निर्माण किया है। प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग की प्रकृति के कारण, इस तरह प्रगति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भू-राजनीतिक जोखिम उत्पन्न कर सकती है।
क्वांटम कम्प्यूटर : अगर सब कुछ ठीक रहा तो आप इसे 2030 अथवा उसके आसपास आप अपने डेस्क/ लैप पर क्वांटम कम्प्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसे सर्वसुलभ होने मे अभी समय लगेगा लेकि हमे ट्रांजिस्टरों और सेमिकंडक्टर चिपों से निजात मिल सकेगी और इनके स्थान पर द्रव से भरा हो सकता है।
यह क्वांटम कम्प्यूटर होगा। जो बुलियन बीजगणित के द्वारा संचालित नहीं होगा। यह कम्प्यूटर अपने तमाम ऑपरेशंस के लिए क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) का प्रयोग करेगा और यही क्वांटम यांत्रिकी ही टेलीपोर्टेशन(किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर बिना स्थान परिवर्तन के पहुँचाना) और सामानांतर ब्रह्मड (Parallel universe) जैसी सैद्धांतिक संकल्पनाओं का आधार है।
संभव है की यह क्वांटम कम्प्यूटर एक डाटा रॉकेट होगा। यह शायद बीते जमाने की पेन्टियम III पर्सनल कम्प्यूटर से 1 अरब गुना ज्यादा तेजी से गणना करने में सक्षम होगा। क्वांटम कम्प्यूटर, चिपों के स्थान पर परमाणुओं का प्रयोग गणना के लिए करते हैं।
हालांकि प्रारंभिक क्वांटम कम्प्यूटर फिलहाल परीक्षण के स्तर पर ही हैं। किंतु उनके निर्माण ने सिद्ध कर दिया है कि आने वाला समय इन्हीं कम्प्यूटरों का है।
क्वांटम कंप्यूटिंग मूलतः तीन प्रकार के होते है.
1.क्वांटम एनेलिंग (Quantum annealing)
2.क्वांटम सिमुलेशंस(Quantum simulations)
3.यूनिवर्सल क्वांटम कंप्यूटिंग (Universal quantum computing)
इनकी विभिन्न प्रकारों में प्रसंस्करण शक्ति (qu-bits) की मात्रा की जरुरत और संभावित अनुप्रयोगों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है। इसके साथ आप आने वाले समय में पलक झपकते ही पूरे इंटरनेट को खँगाल सकने में सक्षम हो सकेंगे और दुरुह और जटिल गणना शायद बीते ज़माने की बात हो जाय और इस तकनीक के माध्यम से एडवांस सिक्यूरिटी कोड को आसानी से तोड़ देगा।
जहां एक तरफ वर्तमान के कम्प्यूटर की गणना को "बिट" या "स्ट्रिंग" में की जाती है जिसे 0 और 1 में दर्शाया जाता है वहीं क्वांटम कम्प्यूटर गणना के लिए "क्यू बिट्स " का इस्तेमाल करेंगे जिसे अप (↑) और डाउन (↓) या दोनों स्थितियों में एक साथ दर्शाया जा सकता है (⇅)
क्यू बिट्स (Qu-bits) जब एक दूसरे से फिजिकली कनेक्ट नहीं भी होंगे तब भी वह क्वांटम इनटेन्गलमेन्ट का या क्वांटम टेलीपोर्टेशन (Quantum teleportation) का इस्तेमाल करके सूचनाओं का आदान प्रदान करने में सक्षम होते हैं
ऐसा माना जाता है कि 40 क्यू-बिट वाले क्वांटम कंप्यूटर की गणना शक्ति आज की वर्तमान सुपर कंप्यूटरों के बराबर हो सकती है।
औद्योगिक क्रांति 4.0 : क्वांटम कंप्यूटिंग औद्योगिक क्रांति 4.0 का एक अभिन्न अवयव है। इसमें सफलता अन्य औद्योगिक क्रांति 4.0 तकनीकों जैसे इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स(IoT), मशीन लर्निंग(ML), रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) का लाभ उठाने के उद्देश्य से रणनीतिक पहलों में मदद करेगी, जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की नींव रखने में मदद करेगी।
इस क्षेत्र मे अमेरिका मे खुलकर शोध और अनुसन्धान कार्य जारी है,की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में क्वांटम कम्प्यूटर से सम्बंधित प्रोजेक्टों पर जोर-शोर से कार्य जारी है जबकि अमेरिकी सरकार ने लॉस अलामॉस नेशनल प्रयोगशाला में क्वांटम कम्प्यूटिंग लैब की स्थापना की है
क्वांटम तकनीक और चीन: इस नवीन तकनीक में महारत हासिल करने के लिए कई देशों में क्वांटम तकनीक में निवेश किया है, लेकिन चीन ने कुल वैश्विक निवेश का 44 प्रतिशत हिस्सा निवेश किया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और कोरिया की तुलना में चीनी विश्वविद्यालयों और कंपनियों ने अधिक पेटेंट दायर किए हैं। ये प्रौद्योगिकी प्रदर्शनकारी यदि सफल होते हैं तो राष्ट्रों को पारंपरिक सैन्य/सुरक्षा संतुलन में चीन की यह लम्बी छलांग होगी इस संबंध में चीन की ज्ञात नागरिक सैन्य संलयन नीति गंभीर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता पैदा कर सकती है।
कल के कैबिनेट के फैसले पर गौर करें तो हम देखते है सात,लोक कल्याण मार्ग और रायसीना हिल्स समय के तकाजे को समझते हुए इस क्षेत्र में भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहती है, बीते सदी जहाँ सेमीकंडक्टर आधारित रही, और दुर्भाग्यवश हम इस क्षेत्र में वह लाभ नहीं ले सके जिसके हम सही हक़दार थे लेकिन शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले से यह क्षेत्र अब अछूता नहीं रहेगा.
इस मिशन के तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलाजी व क्वांटम सामग्री एवं उपकरण के क्षेत्र में चार केंद्र बनाए जाएंगे। इन्हें शीर्ष शैक्षणिक और शोध-अनुसंधान से जुड़े क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। इस मिशन से संचार, स्वास्थ्य, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों के साथ-साथ दवाओं के निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक में बहुत लाभ होगा।
यह डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को भी पूरा करने में मदद करेगा।इस मिशन का संचालन विज्ञान और तकनीक विभाग करेगा। इसमें एक मिशन निदेशक होंगे और उनकी सहायता के लिए एक गर्वनिंग बाडी होगी, जिसकी अध्यक्षता तकनीक और उद्योग के क्षेत्र के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक अथवा उद्यमी करेंगे।


