भारत के शीर्ष नेतृत्व को इस पूरे घटनाक्रम को बेहद समझदारी,संजीदगी और गंभीरता से लेने की जरूरत है।
मालदीव के कट्टरपंथियों के विरोध के तरीके पर सिरे से सोचने की जरूरत है। ये कट्टरपंथी "इंडिया आउट" की तख्ती लिए एक फ़्लैश मॉब की तरह आयोजन स्थल तक सफलतापूर्वक पहुंच कर बेहद सौहार्दपूर्ण तरीके से चल रहे इस वैश्विक स्तर पर जारी योगाभ्यास में अवरोध और तोड़फोड़ मचाते हुए उसे बाधित किया। कटरपंथियो की यह कार्रवाई निश्चित रूप से मालदीव के आसूचनागत तन्त्र की पूर्ण विफलता को दर्शाता है और यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए बेहद चिंताजनक है।
मालदीव की राजधानी माले में भारतीय दूतावास ने एक स्टेडियम में बाकायदे मंजूरी लेकर योग दिवस का आयोजन किया था,जिसमें अधिकारियों सहित अच्छी खासी संख्या में लोग शामिल हुए थे, ये लोग "गार्जियन रिंग"समारोह के तहत योग कर रहे थे,जिसे भारतीय दूतावास ने भारत के लोक प्रसारक दूरदर्शन के डीडी इंडिया और डीडी न्यूज़ के जरिये रियल टाइम टेलीकास्ट भी किया जाना था। योग दिवस पर "गार्जियन रिंग" समारोह भारतीय विदेश मंत्रालय और आयुष मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण समारोह था जिसमे विश्व के 80 स्थानों पर स्थानीय जनता द्वार योग करते हुए योग परम्परा के महत्व को रेखांकित किया जा रहा था। मालदीव में यह आयोजन भारतीय समयानुसार प्रातः 7.45 से 8.00 के बीच तय था लेकिन अचानक 100 से ज्यादा कट्टरपंथी उपद्रवियों ने स्टेडियम पर धावा बोल दिया और योगभ्यास कर रहे लोगों के साथ मार पीट धक्का मुक्की कर योग कर रहे लोगों को भगाने लगे।
जहां एक ओर संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष होने के नाते मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद न्यूयॉर्क में योग करते हुए भारत का धन्यवाद कर रहे थे ,कमोबेश उसी वक्त मालदीव में यह अफसोसजनक घटना घटित हुई,मालदीव का आसूचना तन्त्र पूरी तरह विफल रहा,स्थानीय पुलिस ने उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और काली मिर्च के स्प्रे का इस्तेमाल तो किया,पर वे इस कार्यक्रम को बाधित होने से नहीं रोक सके।
महज,सोच कर देखिए कि अगर ये कट्टरपंथी अगर हथियारबंद होते तो क्या होता ? कितनी तबाही और जन माल का नुकसान होता, यह सिर्फ सोच कर ही सिहरन होती है?
यह घटना हर लिहाज से बेहद दुखद है,इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाय वह बेहद कम है
इन कट्टरपंथियों को भारत या भारतीय ज्ञान के बारे में जो अधकचरा ज्ञान है, यह नाहक हंगामा उसका ही एक ताजा नमूना ज्ञात होता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात मालदीव में यह योग दिवस पहली बार नहीं मनाया गया था। वर्ष 2015 से वहां योग दिवस मनाया जाता है।
इन विध्वंसकारी मानसिकता वाले नासमझ कट्टरपंथियों को ने योग को इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए योगभ्यास के बीच इसके ख़िलाफ़ अरबी भाषा में लिखी इससे संबंधित तख्तियां लहराई
यहां यह बेहद मौजू सवाल है आखिर ये कौन लोग हैं, जो योग और योगभ्यास को लेकर ऐसी संकीर्ण और कुंठित मानसिकता के साथ देख रहे हैं?
इसी कुत्सित मानसिक और शारीरिक संकीर्णता की वजह से विश्व योग दिवस घोषित होने में करीब सात दशक लग गए।
आज पूरे विश्व में लोग धर्म और क्षेत्र से परे,भूगोल और सीमाई बन्धन को किनारे रखते हुए भारतीय योग परम्परा के महत्व को दिल से आत्मसात कर समझने लगे हैं, पर यह बेहद दुर्भाग्यजनक है कि आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग़ वाले 21वीं सदी में आज अभी भी ऐसे कुंठित, विकृत और अतिधर्मान्ध मानसिकता वाले लोग मौजूद है जो भारतीय योग परम्परा को महज एक धर्म तक सीमित कर देखते हैं। जरूरत है ऐसे धर्मान्ध व्यक्तियों,संगठनों और इन्हें प्रायोजित और प्रसारित करने वालों के ख़िलाफ़ बेहद सख़्ती के साथ निपटा जाय।
बेशक,मालदीव में इस्लाम राजकीय धर्म है,पर वह 2015 से योग दिवस का आयोजन कर रहा है जिसमे स्थानीय लोगों की व्यापक भागीदारी भी रही है, इस भारत विरोधी घटना के बाद वहां की सरकार की छवि को व्यापक नुकसान पहुंचा है,भारत सदैव एक संप्रभु,शांतिपूर्ण,समृद्ध और सद्भावपूर्ण मालदीव के लिये प्रतिबद्ध रहा है,साथ ही वह "आल टाइम फर्स्ट रेस्पांडर" भी है।
इसलिये वहां की सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने उन लोगों को समझाए, जो योग को एक धार्मिक कृत्य मानते हैं।
यहाँ इस घटना से हमें 2010 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के इस बयान को एक बार फिर से याद करना बेहद प्रासंगिक होगा,जिसमे उन्होंने कहा था कि,"ये बहुत दुःख की बात है कि मालदीव के कुछ युवा पाकिस्तान स्थित मदरसों में पढ़ाई कर अतिवादी विचारधारा को अपना रहे हैं और जब यही छात्र मालदीव लौटते हैं तो उस अतिवादी विचारधारा को फैलाते हैं।"
उनके विगत एक दशक पूर्व दिए बयान और योग मोहत्सव को बाधित करने वाली कुत्सित कृत्यों में संभवतः इन्ही कट्टरपंथियों का दिमाग हो सकता है। इस तरह से इस्लामिक चरमपंथ बढ़ रहा है और ये एक मुद्दा है, लेकिन आप इसे कैसे सुलझाते हैं ये अलग विषय है.
मालदीव एक बेहद खूबसूरत द्वीपीय देश है,जो अपनी लंबे लम्बे और दूर दूर तक फैले समुद्री बीच,कोरल रीफ के लिए जाना जाता है।
यह देश अपनी प्राकृतिक नैसर्गिक सुंदरता और द्वीपीय पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्व है । मालदीव बिना की भूमि सीमा साझा किए भारत के बेहद करीब है। मालदीव की यही करीबी इस्लामाबाद और बीजिंग, दोनो को आंखों में खटकती रहती है,यहां पर भारत की उपस्थिति उन्हें अपने गले में फंसे हुए मछली के कांटे के समान लगती है।
इसलिए अगर जांच के पश्चात इस विरोध प्रदर्शन में इन दोनों देश की किसी भी तरह की भूमिका का पर्दाफाश हो,तो किसी को आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए।
इसलिये मालदीव में हुए भारत विरोधी हरकत को स्वाभाविक ही किसी गम्भीर समस्या के प्रति पूर्व चेतावनी स्वरूप समझनी चाहिए।
हालिया वर्षो में मालदीव में भारत की बढ़ती भूमिका और उसकी मालदीव के साथ उसकी रणनीतिक भागीदारी रावलपिंडी और बीजिंग को निश्चित रूप से चिंतित करती होगी।
हालिया वर्षो में मालदीव में भारत की बढ़ती भूमिका और उसकी मालदीव के साथ उसकी रणनीतिक भागीदारी रावलपिंडी और बीजिंग को निश्चित रूप से चिंतित करती होगी।
मालदीव में चीन ने अपनी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति और बेल्ट और रोड पहल के तहत व्यापक अधोसंरचनात्मक और अवसंरचनात्मक क्षेत्र में व्यापक पूंजी निवेश कर चुका है,वह अपनी "डेब्ट ट्रैप
डिप्लोमेसी"के जरिये इस खूबसूरत देश को अपनी ऋण ग्रस्तता का शिकार बनाना चाहता है।
मालदीव के मारायो/मराओ बन्दरगाह पर उसकी बहुत पहले से नजर है,यह उसके स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति में ग्वादर के बाद अहम पड़ाव है। भारत इस क्षेत्र का नैसर्गिक नेतृत्वकर्ता है और यहां पर चीन की मौजूदगी हमें निश्चित रूप से नागवार गुज़रेगी क्योंकि चीन की मौजूदगी सीधे तौर पर हमारी संप्रभुता पर सवाल उठातीहै।
मालदीव भारत के लिए सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है,और यहां होने वाली सामान्य सी हलचल और उथल पुथल भारत के लिये चिन्ता का सबब बनता है।सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2008 में समुद्र के रास्ते मुंबई पर हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमले जैसी दूसरी घटना मालदीव के रास्ते से भी संभव है। इसलिये नैसर्गिक रूप से दोनो देश अपने सुरक्षा को लेकर खासे सजग और सतर्क रहते है।
हालांकि मालदीव का शीर्ष नेतृत्व ने बार बार भारत को आश्वस्त किया है कि मालदीव की धरती का इस्तेमाल कभी भी भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं हो सकता।
इसलिए मालदीव में भारत की उपस्थिति चीन को प्रतिसन्तुलित करने के लिए बेहद जरूरी है।
योग और योग परम्परा भारतीय राजनय की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का एक अभिन्न अवयव है जिससे सभ्यतागत और सांस्कृतिक मेल जोल को बढ़ावा मिलता है। यहाँ यह जांच का विषय है कि ऐसे कौन लोग हैं, जो योग के मामले में लोगों को बहका रहे हैं। भारत या भारतीय उत्पाद,ज्ञान विरोधी मानसिकता रखने वाले लोग संगठन या कोई देश को इस मसले पर भी भारत को इनसे प्रभावी रूप से निपटने की जरूरत है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मसले पर भी हमारी सरकार पर्याप्त रूप से सक्रिय है।
यह सर्वविदित है कि पूरी दुनिया में लोग योग और इसके महत्व को समझने लगे हैं,यह सांस्कृतिक विरासत किसी धर्म या पन्थ के खिलाफ नहीं है। आज योग और उसके महत्व को बिना किसी रंगीन चश्मे से कहीं ऊपर उठ कर देखने की जरूरत है।
इसके अतिरिक्त योग का और बेहतर प्रसार के लिए पूरी दुनिया के साथ भारत को योग पर एक बेहतर और प्रभावी संवाद स्थापित करना चाहिए।साथ ही गार्जियन ऑफ रिंग जैसे महोत्सव को और बड़े पैमाने पर मनाये जाने की जरूरत है।
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