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Sunday, January 23, 2022

Abide with me से ए मेरे वतन के लोगों...

हर बात को गांधी बापू से जोड़ दीजिये,काम खत्म,विवाद शुरू। यह अब नहीं चलेगा।

वैसे भी #बीटिंग_रिट्रीट समारोह या कोई और समारोह  में हमारी धुन क्या हो यह रायसीना की पहाड़ियां निर्णय करेगी न कि टेम्स का बिग बेन और देश में मौजूद अंग्रेजीदां लोग। वैसे भी "हम"{WE..} निर्विवाद रूप से पूरी सक्षम और संप्रभु हैं अपनी धुन सहित अन्य तमाम फैसले लेने के लिए।


बहुत सुना हमने मातमी #abide with me...को, मान भी लिए इस धुन की वैश्विक सैन्य जगत में इसकी लोकप्रियता को,चलिए ठीक है।

....लीजिये अब आप सुनिए कवि प्रदीप की अमर कृति और #लता दीदी की मखमली,चिर अविस्मरणीय और ओजपूर्ण स्वर में "#ऐ_मेरे_वतन_के_लोगों... और गर्व कीजिये खुद पर भारतीय होने का, पूरी तरह वशीभूत हो जाइए इसके मार्मिक बोल पर और डूब जाइये इस गीत में और हो सके तो खुद को संभाल लीजिये कि इस दौरान आपके आंखों से आंसू का एक कतरा न छलके, प्रयास कीजियेगा। 

पूरी गारंटी के साथ कह सकता हूँ कि इस गीत पर आप पूरी तरह खुद पर जम कर इतरा सकते हैं और याद कर सकते हैं उन शूरवीर जांबाजों के असाधारण,अनुपम,अनुकरणीय बलिदान को,आगे क्या ही कहूँ,भावविह्वल और भावविभोर भावनाओं को स्वयं में महसूस कीजिये..इनकी तो ..कलम भी जय बोलती है।

हमारा अपना गौरवपूर्ण संगीत का अतीत है इसलिए हम अपना धुन स्वयं चुनेंगे। इसपर किसी को कोई गिला शिकवा होना ही बेईमानी है और मातम मनाना निरा मूर्खतापूर्ण कार्य।

हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि अंग्रेजी कुशासन ने भारत पर जुल्मों सितम ढाने की इन्तिहां कर दी।

 इनकी कुव्यवस्था,निर्दयतापूर्ण कुशासन और मक्कार आर्थिक नीतियों के त्रिभुजाकार शासन व्यवस्था ने आज तक पूरे देश को गर्त में धकेला हुआ है,जिससे हम उबरने की पूरी जद्दोजहद कर रहे हैं।

औपनिवेशिक ब्रिटिश कुशासन ने अपनी द्वेषपूर्ण,मक्कारी और कुटिल चाल और निर्दयतापूर्ण तरीके से समृद्ध,स्वच्छ, निर्मल और अविरल हुगली के पूरे पानी को विशाल औपनिवेशिक ब्रिटिश स्पंज से सोख कर मैली,प्रदूषित टेम्स को साफ कर दिया। इसलिए तो कहा भी जाता है कभी लंदन से ज्यादा समृद्ध मुर्शिदाबाद था। कमबख्त,औपनिवेशिक अंग्रेजी कुशासन भारत को आखिरकार पूरी तरह लूट खसोट कर चले तो गए और छोड़ गए अंग्रेजियत जिसे आज भी हम भारतीय आये दिन सामना करते रहते है।

भारत में अंग्रेज अपने सफेद झूठ,कपटपूर्ण कार्य,मक्कारी से भरी हुई नीतियों की वजह से कुख्यात रहे हैं। ब्रिटिशों ने भारत के समृद्ध और गौरपूर्ण इतिहास ,संस्कृति, आर्थिक और सामाजिक ताने बाने और पूरे भौगोलिक संरचनाओं को स्कॉच के नशे में धुत्त होकर इसे बलत्कृत किया,जिसका दंश आज तक हम भुगत रहें हैं और पता नहीं ,कब तक और कितनी आने वाली पीढ़ी इसे भुगतेगी।

अंग्रेज आखिर कर भारत से चले तो गए पर इन्होंने हमारी विलक्षण सभ्यता को नाश करने में कोई कोताही नहीं बरती,इतिहास गवाह है इनके काली करतूतों का,बहुत ज़ख्म दिए हैं । अंग्रेजों ने हमारे देश को जो आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी उतने ही हरे हैं।
यह कभी न भूलने वाली बात है,यकीन मानिए जिस दिन आपने इसे भुलाया,उस दिन से आप परतंत्रता की बेड़ियों की अग्रसर होने की राह पर नङ्गे पांव चल पड़ेंगे।

इन्होंने हमारी सांस्कृतिक आचरण को भी बुरी तरह प्रदूषित किया,हमारी अधोसंरचना में इनके रक्तबीज माफ़िक उत्प्रेरक अभिलक्षण को आप आज भी देख सकते हैं, संभवतः आये दिन जूझते भी हों। इतिहास से सीख लीजिये,सबक लीजिये,अंग्रेजी कुशासन ने हमें क्या दिया इसका आकलन आप बिना किसी के झांसे में आते हुए स्वयं कीजिये,आत्मचिंतन और मंथन कीजिये सब समझ में आ जायेगा।

अंत में आप भारत के अक्षांश और देशांतर पर भी गर्व कर सकते हैं, महज फ़र्ज़ कीजियेगा कि अगर आप इस खास "अक्षांश और देशांतर"के इतर के नागरिक होते। तो,नक्शे पर दौड़ाइये अपनी नज़रों को और खुद महसूस कीजिये फ़र्क़ को।