प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को चेन्नई में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को स्वदेशी रूप से विकसित पहला अर्जुन मार्क–1ए मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) सौंपा और अर्जुन ने प्रधानमंत्री को शानदार गन सैल्यूट दिया।
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इसके साथ ही इसे सेना को सौंपने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन(डीआरडीओ) ने भारतीय सेना को जमीनी युद्ध में "हंटर किलर" माने जाने वाली इस अत्यधिक घातक और शत्रु सेना और उसके प्रतिष्ठानों के लिए "निर्दय" "निर्मम"और "निष्ठुर" माने जाने वाले स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन मार्क 1A को सेना को सौंपा।
इस टैंक को डीआरडीओ के एकक संग्राम वाहन अनुसंधान तथा विकास संस्थापन (CVRDE) और अन्य संस्थानों ने मिलकर डिजाईन किया है टैंक का डिजाइन और उत्पादन करेगा। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की "आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना" और "मेक इन इंडिया" के महत्वाकांक्षी पहल के तहत बनने वाला अत्याधुनिक टैंक है।
रक्षा विशेषज्ञ भारतीय सेना के इस अर्जुन मार्क 1A टैंक को "और तेज',"अत्यधिक विनाशकारी" और "शत्रु खेमे में वज्र माफिक प्रहार" करने वाला आधुनिक संस्करण मानते हैं।
इन अर्जुन मार्क1ए टैंकों की कुल निर्माण लागत लगभग ₹8500 करोड़ होगी।जिससे करीब 200 उद्योगों और 8000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा जो आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को अभिवर्द्धन करेगा।
इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जिसके पास अपने मुख्य युद्धक टैंक और हल्के लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता है। भारत रक्षा उपकरण, डिजाइन, विकास और विनिर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल ने एक और प्रमुख मील का पत्थर हासिल किया है।
इस उपलब्धि के साथ अर्जुन मार्क1ए,ऑस्ट्रियाई लेपर्ड 2 ,ब्रिटेन की चैलेंजर2,दक्षिण कोरिया की के2 ब्लैक पैंथर ,इस्रायल की मेरकवा ,जापान की टाइप 10,फ्रेंच एएमएक्स टैंक(AMX Char Leclerc Battle ) इटली की सी1अरिएट, चीन की टाइप 99 या ZTZ99,तुर्की की अल्टेय बैटल टैंक,रूसी मूल की T-80,T-90 अर्माटा,पोलैंड की पीटी-91 और ईरान की जुल्फिकार,अमेरिका की एम60 या 120एस, एम1एब्रम्स के साथ शामिल हो गया
है।
चार क्रू सदस्यों (टैंक कमांडर,गनर,लोडर व चालक ) वाले इस बख्तरबंद टैंक की गतिशीलता,चपलता और विचलनता का कोई जोड़ नहीं है।
अपने नाम के अनुरूप सटीक,प्रभावी और अचूक लक्ष्य भेदन क्षमता है,साथ ही यह निम्न ग्राउंड प्रेशर,उच्च क्षमता वाले भार अनुपात,पावर पैक और ग़जब की फायर पावर प्रदर्शन के लिए अत्याधुनिक और बेहद प्रभावी संचार संसाधन,इसमें फिन स्टेबलाइजड आर्मर पियर्सिंग डिस्कार्डिंग सिस्टम (FSAPDS) और हाई एक्सप्लोसिव स्क्वाश हेड (HESH),थर्मोबारिक(TB) और पेनेट्रेशन सह ब्लास्ट (PCB) एम्मयूनिशन,कन्टेनराइजेड एम्मयूनिशन बिन विथ इंडिविजुअल शटर(CABIS) जैसे अत्याधुनिक तकनीक से युक्त है।जो इसे एक संपूर्ण मुख्य युद्धक टैंक बनाते है।
आर्मामेंट: इसमें एक 120 एमएम मुख्य गन सिस्टम,एक 12.7mm का रिमोट वेपन सिस्टम और 7.62mm वाले कोएक्सियल मशीन गन शामिल है।
फायर एक्सेसीरीज : लेजर रेंज फाइंडर, कंप्यूटरीकृत फायर नियंत्रण प्रणाली,ऑक्सिलरी पावर यूनिट,थर्मल नाईट विजन,लेजर वार्निंग और
काउंटरमेजर्स सिस्टम,उन्नत नौवहन प्रणाली,नाभिकीय,जैविक,रासायनिक हमलों से निपटने के लिए प्रणाली, फ्यूम एक्सट्रेक्टर और इंटेग्रेटेड फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम।
अत्याधुनिक "कंचन " और एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर सिस्टम से निर्मित इस बख्तरबंद टैंक को छोटे तथा मध्यम आकार वाले हथियारों से गोलीबारी, ग्रेनेड के शेल स्पिलंटर के हमलों से बचाता है।
लगभग 11मीटर लम्बी,3.18 मीटर ऊंची,और 3.95 मीटर चौड़े इस आकर्षक और शत्रु खेमे में विनाशकारी क्षमता युक्त अर्जुन टैंक का कोई सानी नहीं है। लगभग 68000 किलोग्राम के युद्धक भार क्षमता वाले इस मुख्य युद्धक टैंक की रेंज 500 किलोमीटर और हमला करने की अधिकतम गति 57 - 70 किलोमीटर/घण्टा है।
भारतीय सेना अब इस अजेय और दुर्जेय टैंक की दो और रेजीमेंट बनाने वाली है जो अगले छह महीनों में सेना में शामिल कर ली जाएंंगी। प्रत्येक रेजीमेंट में 59 अर्जुन टैंक होंगे। 16 साल पहले सेना में शामिल किए गए 124 ‘अर्जुनों’ की तुलना में मार्क-1ए टैंक में बेहतर मारक क्षमता, गतिशीलता और सुरक्षा है। एक रक्षा वैज्ञानिक के अनुसार प्रत्येक मार्क-1ए टैंक की कीमत 54 करोड़ रुपये होगी।
अर्जुन मार्क-1ए टैंक की खासियत
यह टैंक "अपने लक्ष्य को स्वयं तलाश करने " में सक्षम है। यह स्वयं तेजी से आगे बढ़ते हुए दुश्मन के लगातार "गतिशील लक्ष्यों "पर भी सटीक प्रहार कर सकने में सक्षम है।
माइन प्लॉयविंग: टैंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रणक्षेत्र में बिछाई गई माइंस को साफ करते हुए आसानी से आगे बढ़ सकता है।
इसके अलावा इसमें कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इस टैंक को न केवल बेहद मजबूत बनाते हैं बल्कि सटीक प्रहार करने में इसका कोई सानी नहीं है।
CVRDE ने इसके पूर्ववर्ती अर्जुन मार्क 1 में सेना के इच्छानुसार और भविष्य की जरूरतों के लिए कुल 89 बदलाव किए। इन तमाम बदलाव,आधुनिकीकरण और परियोजना के विकास पर नजर रखने के लिए अर्जुन कोर कमिटी के गठन किया गया। इसमें Directorate General of Quality Assurance (DGQA), the Corps of Electronics & Mechanical Engineers (EME) और सेना की सहभागिता होती थी।यह समिती मासिक रिपोर्ट की समीक्षा करती थी।
मुख्य बदलाव.
इसका वजन 62 टन से बढ़ा 67 टन किया गया,इसके साथ इसके ग्लेसिस प्लेट और टरेट(Turret) पर ट्रैक विड्थ,माइन प्लो,और एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर(ERA) लगाया गया। रेगिस्तानी युद्ध में प्रभावी प्रदर्शन के लिए MTU इंजन और RENK ट्रांसमिशन सिस्टम से सुसज्जित किया गया है।
टैंक के भीतर तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है,इससे क्रू मेंबर की सुविधा के लिए एयर फिल्टरेशन और उन्नत कूलिंग सिस्टम को लगाया गया है ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके। क्रू मेंबर के लिए ऑक्सीजन के लिए बेहतरीन फिल्टर लगाए गए हैं। उन्नत सस्पेंसन प्रदान करने के लिए इसमें नई "हल"(Hull) लगाया गया है।
इन बदलाव के बाद यह मुख्य युद्धक टैंक मिसाइल फायरिंग में सक्षम हो गया है,जो अर्जुन मार्क 1 में नहीं थी। इस्रायली LAHAT मिसाइल सिस्टम, टैंक के टरेट पर लगा उन्नत रिमोट संचालित शस्त्र प्रणाली शामिल है।
टैंक कमांडर के लिए नाईट विजन,हंटर किलर क्षमता वाली उन्नत पैनोरोमिक साईट है जो कमांडर को गनर और लोडर के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायक होती है।
रूसी मूल के टी श्रृंखला के टैंक में ऑक्सिलरी पावर यूनिट(एपीयू) का आभाव है।जिससे अत्यधिक ऊर्जा खपत होती है,अर्जुन मार्क 1ए में इस प्रणाली का उपयोग कुया गया है।जिससे टी श्रृंखला के मुकाबले कारीब आधी ऊर्जा की खपत होती है।
इससे पहले सरकार ने 118 उन्नत अर्जुन टैंक खरीदने को 2012 में मंजूरी दी गई थी और 2014 में रक्षा खरीद समिति ने इसके लिए 6600 करोड़ रुपये भी आवंटित किये थे लेकिन सेना ने इसकी "फायर क्षमता" समेत कई पक्षों पर सेना ने जरूरी सुधार की मांग रखा, साथ साथ सेना ने अपनी मौजूदा क्षमता को बरकरार रखने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 2015 में रूस से 14000 करोड़ रुपये में 464 मध्यम वजनी टी-90 टैंक की खरीद का सौदा को अंतिम रूप दिया था। सेना की जरूरी बदलाव आधार पर उन्नत किए जाने के बाद अर्जुन टैंक मार्क-1ए को 2020 में हरी झंडी मिली थी।
भारतीय सेना के आर्टिलरी बेड़े में भारी भरकम 124 अर्जुन टैंकों की एक रेजीमेंट पहले से ही साल 2004 में शामिल की जा चुकी है, जिसे पश्चिमी सीमा सहित अन्य स्थानों पर तैनात किया जाता रहा है। । इन पुराने टैंको की ऑपरेशनल समीक्षा के बाद डीआरडीओ ने इस नए संस्करण को तैयार किया है। अब शामिल किए जा रहे 118 अर्जुन टैंक अतिरिक्त फीचर वाले हैं और पहले से ज्यादा मारक क्षमता वाले हैं। इनके लिए एक और बख्तरबंद रेजीमेंट बनाई जाएगी।
अर्जुन सीरीज का आखिरी बैच।
118 अर्जुन मार्क-1ए टैंक संभवतः इस सीरीज का आखिरी बैच होेंगे। भारतीय सेना इन 68 टन वजनी होने को एक परिचलगत समस्या मानती है क्योंकि इसे एयरलिफ्ट करने में खासी दिक्कत होती है। खासतौर पर चीन के खिलाफ लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में इस टैंक की तैनाती बेहद दुरूह हो जाती है। यहां माउंटेन वारफेयर के लिए सेना पहले ही 20 से 25 टन के हल्के और 30 से 50 टन वजन के मध्यम टैंक की आवश्यकता जता चुकी है।जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर फौरन तैनाती की जा सके


