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Thursday, October 22, 2020

2+2 वार्ता :भारत-अमेरिकी रणनीतिक सम्बन्धों को मिलेगा नया आयाम।

 भारत,श्रीलंका,मालदीव और इंडोनेशिया की यात्रा पर निकले भ्रमणकारी अमेरिकी विदेश सचिव की यात्रा में भारतीय पड़ाव के बीच होने वाली यह 2+2 उच्चतर वार्ता दोनो देशों के रणनीतिक सम्बन्धों को निश्चित रूप से नया आयाम देगा।


भारत और अमेरिका अगले हफ्ते उच्चस्तरीय 2+2 वार्ता के लिए बातचीत करेंगे,भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी पक्ष को विदेश सचिव माइक पोम्पियो और रक्षा सचिव मॉर्क एस्पर आगामी 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में करेंगे।

इंडो पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते रणनीतिक बिसात और अमेरिकी चुनाव और उसके आने वाले नतीजे, मालाबार श्रृंखला के नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया का शामिल होने की पुष्टि,भारत चीन के बीच वास्तविक सीमा रेखा पर बनी तनातनी के बीच आगामी हफ्ते के बाद होने वाली यह 2+2 की उच्चस्तरीय वार्ता और उसके आसन्न परिणाम से पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के राजनयिक और रणनीतिक आबो हवा बदलने की पूरी संभावना है।

विदेश सचिव पोम्पियो की भारत के अतिरिक्त ,श्रीलंका,मालदीव, और इंडोनेशिया की यात्रा गाहे बगाहे बहुत कुछ संकेत देती है, जहां माले और कोलम्बो बुरी तरह चीनी "डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी "और चीनी ऋण ग्रस्तता के शिकार है वहीं चीन की "मलक्का दुविधा" और "क्रॉ कैनाल सिंड्रोम " के बीच जकार्ता की पोम्पियो की यात्रा और विस्तारित क्वाड (Extdnded Quad) की नए संकल्पना को नए आयाम देने की उम्मीद की जा सकती है।


अमेरिकी रक्षा सचिव मॉर्क एस्पर 21वीं सदी में भारत अमेरिका के संबंधों को "Most Consequential Partnerships"मानते हैं।उन्होंने हिन्द प्रशांत को जैवभौगोलिक क्षेत्र बताते हुए जिसमे हिन्द महासागर,,पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर,के साथ साथ दक्षिणी चीन सागर शामिल है और चीन सम्पूर्ण दक्षिणी चीन सागर पर ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपना सम्प्रभु क्षेत्र बताता है। जबकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी दक्षिणी चीन सागर पर भी अपना दावा करते है।

मॉर्क एस्पर के मुताबिक “बीते वर्ष हमने प्रथम तीनो सेनाओं के मध्य सैन्य अभ्यास "टाइगर ट्रायम्फ़"(Tiger Triumph) सफलता पूर्वक सम्पन्न किया,जिसमे दोनो देशों की तीनों सेना ने समन्वित रूप से पूरा किया। जबकि जुलाई में हिन्द महासागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत निमिट्ज़ ने भारतीय नौसेना के साथ ट्रांजिट अभ्यास किया।
उन्होंने कहा कि बीते सितम्बर माह में हमने भारत-अमेरिकी डिफेंस साइबर डायलॉग को साझा किया, अब हम विभिन्न नए क्षेत्र में अपने संभावना को साथ में तलाश रहे हैं। हमारे साझा प्रयासों से हमारे रिश्ते और बेहतर होंगे।
इस वार्ता के दौरान फाइव ऑय फोरम (Five Eyes Forum) पर भी भारत के महत्व पर भी चर्चा होगी जिसमे अमेरिका, न्यूजीलैंड, ग्रेट ब्रिटेन,कनाडा, शामिल है जो इंडो पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से घटित हो रहे घटनाओं पर सूक्ष्म निगाहें गड़ाये हुए है ।
इस मंच के जरिये सम्प्रभुता,अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन जैसी व्यवस्था को लागू करने में इस मंच का इस्तेमाल किया जा सकता।

इस वार्ता के बाद दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच परस्पर संबंध को बेहतर बनाने के लिए उच्च स्तरीय  सैन्य प्लेटफॉर्मो के आदान प्रदान के लिए समझौते को पूर्ण रूप से मूर्त रूप दिया जा सकेगा । वर्ष 2018 से शुरू हुए इस 2+2 वार्ता के बाद भारत अमेरिका के संबंधों के एक नया दौर शुरू हुआ है,जिसमे

1.2002 में  सामान्य सुरक्षा सैन्य सूचना समझौता
 [General Security of Military  Information Agreement(GSOMIA),

2. 2016 में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज ऑफ मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट[Logistic Exchange Memorandum of Agreement(LEMOA) ] इसे तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की देन कहा जाय तो कोई विसंगति नहीं होगी।

3.Communication Compatibility and Security Agreement 2018 (COMCASA) जिसे सुषमा-निर्मला और पोम्पियो और जेम्स मैटिस के अथक प्रयास से संभव हुआ।

अंतिम समझौते के रूप के रूप में  भू स्थानिक सहयोग हेतु बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता 4. [Basic Exchange and Cooperation Agreement For Geo Spatial Cooperation(BECA)]के मसौदे पर बातचीत गंभीरता से जारी है। अमेरिका और भारत दोनो को  उम्मीद थी कि BECA को इसी दौरे पर अंतिम रूप दे दिया जाएगा,लेकिन सम्भव है कि दोनो पक्षों के बीच कुछ मसले पर रार बची हुई थी,लेकिन वर्तमान इंडो पैसिफिक क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात ,चीन भारत की सीमाओं पर उपजे संकट के बीच इस समझौते की जमीन तैयार हो रही है।

अगर फ़्लैशबैक में जाकर इन उच्च वार्ताओं पर नजर डालें तो बीते जून के तीसरे हफ्ते में अमेरिकी विदेश सचिव माइक पोम्पियो और उनके भारतीय समकक्ष डॉ एस जयशंकर, तत्पश्चात भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और उनके अमेरिकी समकक्ष रॉबर्ट सी ओ ब्रायन, अमेरिकी ज्वाइन्ट चीफ ऑफ स्टॉफ जनरल मॉर्क मिली और उनके भारतीय समकक्ष जनरल विपिन रावत और अमेरिकी रक्षा सचिव मॉर्क एस्पर और भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बीच कई स्तर की बातचीत और हालिया अमेरिकी विदेश उप सचिव बिगन के भारत दौरे और डॉ जयशंकर से हुई वार्ता के पश्चात दोनो देशों के बीच अगले हफ्ते 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता की तारीख का एलान के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि,दोनो देश बदलती भू राजनीतिक परिदृश्य में बचे हुए समझौते,जिसे मूर्त रूप प्रदान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

क्या है BECA [(Basic Exchange and Cooperation Agreement For Geo Spatial Cooperation(BECA)]
: इसे हम अत्याधुनिक और उन्नत "जिओ स्पेशियल इंटेलिजेंस" का उदाहरण मान सकते है।

इस बहुप्रतीक्षित समझौते के संपन्न होने के पश्चात भारतीय सशस्त्र बल मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना अमेरिकी उन्नत जिओ स्पेशियल इंटेलिजेंस" तकनीक जिसके अंतर्गत सैटेलाइट इमेज और आंकड़ो और उसके अनुप्रयोग को पूर्ण सटीकता के साथ "रियल टाइम"मोड में जल,जमीन और अनन्त आकाश में इस्तेमाल कर पायेगी।

इसे छोटे नौका से लेकर कर वायुयान के सटीक लोकेशन तक, युद्ध के दौरान लक्ष्य भेदन,आपदा के समय सही आकलन और अनुमान आदि में किया जा सकता है।
इस समझौतों के पश्चात भारत इस अत्याधुनिक तकनीक से भारत की संप्रभुता को निशाना बनाने वाली किसी भी मिसाइल, सशस्त्र ड्रोण की चुनौती को समय रहते इनका निपटान कर सकने में सक्षम होगा।
इस समझौते के बाद भारतीय बल उच्च गुणवत्ता वाले जीपीएस की मदद से रियल टाइम आसूचना प्राप्त कर सकेगी। वहीं नौवहन क्षेत्र में टोपोग्राफिकल और एरोनॉटिकल डेटा का उन्नत और सामरिक इस्तेमाल संभव हो सकेगा।
यह समझौता भारतीय वायुसेना और अमेरिकी वायुसेना के बीच तकनीकी गुणवत्ता और आपसी सहयोग की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
इन समझौतों की बात इसलिए कि जा रही है क्योंकि आने वाले दिनों में युद्ध स्वरूप बदल जायेगा
जिसे स्पेक्ट्रम वारफेयर के रूप में देखा जाएगा और सशस्त्र बलों के सफलता का दारोमदार इनके सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड संचार उपकरण जिसे हाई एन्ड सिक्योर्ड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स कहा जाता है,जो संवेदनशील सैन्य सूचनाओं  को साझा करने का मार्ग प्रशस्त करता है और सैन्य सेवा कार्य के लिए सैन्य सुविधाओं पारस्परिक उपयोग की परिकल्पना साकार करता है। 

अमेरिका के साथ दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच  परस्पर संबंध को बेहतर बनाने के लिए उच्च स्तरीय  सैन्य प्लेटफॉर्मो के हस्तांतरण की अनुमति के लिए चार समझौतों में तीन पर दस्तखत किए है और अगले हफ्ते होने वाली बातचीत के दौरान चौथे समझौते पर दस्तखत की पूरी उम्मीद है।

भारतीय सैन्य बलों द्वारा अमेरिका से प्राप्त इन संचार उपकरणों को अमेरिकी प्लेटफॉर्म पर लगाया जाएगा । वर्तमान में भारत कम से कम पांच अमेरिकी सामरिक और रणनीतिक प्लेटफॉर्म का संचालन करता है,

जिसमे लॉकहीड मार्टिन की ट्रूप्स एयर लिफ्टिंग के लिए C-130J सुपर हरक्यूलिस(C -130J Super Hercules),भीमकाय C-17 ग्लोबमास्टर3 सैन्य परिवहन विमान, समुद्र में लंबी निगरानी करने और पनडुब्बी रोधी वारफेयर में अव्वल Poisiden8I(P-8I) विमान, बोइंग की सुपर हैवी लिफ्टर हेलीकाप्टर चिनूक (चिनूक सीएच-47),और बोइंग की अत्याधुनिक टैंक किलर हेलीकॉप्टर अपाचे, पनडुब्बीरोधी वारफेयर में माहिर हेलीकॉप्टर एमएच 60 रोमियो एन्टी सबमरीन वारफेयर हेलीकॉप्टर शामिल होंगे।



पाइवोट ऑफ एशिया 2.0,इंडो पैसेफिक और क्वाड की चतुष्कोणीय संकल्पना, चीन पाकिस्तान  मलेशिया और तुर्की के भारत के प्रति कुटिल चतुष्कोणीय गठजोड़,जो हिन्द महासागर के  गहरे समुद्र में गुपचुप गस्त लगते चीनी स्टील्थ पनडुब्बी,व्यापार और विश्व मंचो पर जहर उगलते एर्डोगन के बयान के बीच अमेरिका फर्स्ट के अगुवा ट्रम्प बेबाक और बेलाग है,आसन्न राष्ट्रपति चुनाव में उनका क्या होगा, आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे क्या होंगे ? इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में में है,लेकिन ट्रम्प प्रशासन का चीन के प्रति कड़े और हमलावर रूख़ से चीन को बैकफुट पर धकलने की अंकल सैम की कोशिश जी जान से जारी है।

चीन से हुए ट्रेड वॉर और उससे हुई अमेरीकी ट्रेजरी के नुकसान,लगातार अस्थिर होते निवेश बाजार,स्टील और एल्युमीनियम और भारत के साथ टैरिफ वारफेयर,जीएसपी मसले पर भारत से रार ,पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में  तेजी से बदलते राजनीतिक सुर सामरिक हालात और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन मसले पर चीन की आक्रमक रवैये ने दुनिया के इस पुलिसमैन को जॉन फॉस्टर डलेस की नीति "जो हमारे  साथ नहीं वह हमारे विरुद्ध है" सिद्धान्त के विपरीत इस वक़्त अमेरिका को विभिन्न मोर्चे पर भारत के साथ की सख़्त दरकार है।

 प्रसिद्ध राजनीति विज्ञानी स्टेंली हॉफमैन का मानना था कि"सभी प्रमुख देशों में से भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसके साथ संयुक्त राज्य के संबंध उलझन पैदा करने वाले रहे हैं " मौजूदा दौर में भी गाहे बगाहे उनकी बात सत्य हो ही जाती है,अमेरिकी शीर्ष नेतृत्व को चाहिए कि हॉफमैन की बातों को सिरे से खारिज़ करें
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भारतीय विदेश नीति : पंचशील से पंचामृत  तक अनवरत सफर।

भारतीय मनीषी परम्परा में पंचामृत का अर्थ है पांच अमृत। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से मिलकर तैयार होता है पंचामृत जो मंदिरों पर विशेष अवसरों पर चढ़ाया जाता है और इसका प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है। इसी कड़ी में भारत के महाशक्तियों के साथ सम्बन्ध, "नेबरहुड फर्स्ट" इंडो पैसिफिक डॉक्ट्रिन, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेन्स की नीति ,छोटे और द्वीपीय देशों के साथ आत्मीय संबंध,अफ्रीका के लिए संवेदनशील नीति ,पर्यावरण और संपोषणीय विकास और संघर्षों में शामिल देशों के लिए सॉफ्ट पॉवर डिप्लोमेसी के जरिये भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय मंचो पर एक जिम्मेदार राष्ट्र की बनी है।
वर्तमान सरकार की  विदेश नीति की प्राथमिकता आर्थिक विकास  और भू आर्थिकी और ऊर्जा सुरक्षाके त्रिकोणीय क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है को गति देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार करना जिससे  भविष्य में  भारत की स्थितिगत और क्षेत्रगत स्थिति में वृद्धि हो।
इस  सरकार  की विदेश नीति में साइबर सुरक्षा ऊर्जा समुद्री सुरक्षा,पड़ोसी  देशों के साथ सहयोग,क्षेत्रीय सहयोग , महत्वपूर्ण हैं । भारत अमेरिका  के बीच  उभरते व्यापारिक साझेदारी के अतिरिक्त रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण बिंदु है दोनो देश के बीच आतंकवाद निरोधक सहयोग का बढ़ना।दोनो देश नागरिक केन्द्रित पहलू को प्राथमिकता देते  हुए उनकी रक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते है,क्षमता निर्माण और आसूचनागत तथ्यों का आदान प्रदान इसी कड़ी का हिस्सा है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचो पर पहले पाकिस्तान की छवि झूठे,चलबाज़ और मक्कार के रूप में थी जो वर्तमान में बदलकर बेहया,बेशर्म,पतित और निर्लज्ज हो  चुकी है। भारत को चाहिए कि पाकिस्तान के साथ उसके सहगोगी देशों जैसे तुर्की ,मलेशिया को भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचो पर उसकी क्रियाकलापों को पूरी निष्ठुरता के साथ जवाब दें और उनपर "अन्य सभी कार्रवायी"के विकल्प हरदम खुले रखें साथ ही अमेरिका को चाहिए कि पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों द्वारा भारत के खिलाफ अनर्गल,बेबुनियाद और तथ्यों से परे आरोपों और भारत में आतंकवाद के  मसले पर "घोड़े, गधे और खच्चर" के बीच फ़र्क़ महसूस करे अन्यथा उसकी कही तमाम बातें महज कोरी की कोरी रह जाएंगी।





इंडो पैसिफिक:कैलिफोर्निया से किलिमंजारो तक ।

भारत-प्रशांत क्षेत्र हमेशा की तरह अमेरिकी राष्ट्रपति की प्राथमिकता में रहा ट्रंप ने चार देशों-अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत या क्वैड की साझा संकल्पना को बढ़ाने को रेखांकित किया जिससे  आतंकवाद पर लगाम लगाने के साथ भारत की विस्तृत समुद्री सुरक्षा और निर्बाध नौवहन को सुनिश्चित किया जा सके भारत-प्रशांत क्षेत्र को परिभाषित करने को लेकर शुरुआती हिचक के बाद ट्रंप प्रशासन अब इसे लेकर स्पष्ट नजर आ रहा है कि भारत के पश्चिमी छोर से लेकर अफ्रीका के पूर्वी छोर तक का समुद्री इलाक़ा भारत-प्रशांत क्षेत्र है।क्षेत्रीय सहयोग आधारित परियोजनाओं को गति देने पर जोर चूंकि भारत और अमेरिका, दोनों चीन की बेल्ट रोड परियोजना को लेकर संशकित हैं इसलिए क्षेत्रीय सहयोग आधारित परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें ब्लू डॉट नेटवर्क भी शामिल है. इसमें ऐसी परियोजनाएं शामिल होंगी जो पारदर्शी, समावेशी और आर्थिक एवं सामाजिक रूप से उपयोगी तथा पर्यावरण हितैषी होंगे।


भारत और अमेरिकी रक्षा सम्बन्ध महज एक रात में विकसित नहीं हुआ है,भारत ने अमेरिका को 1954 से शीतयुद्ध काल तक अपने विरुद्ध और पाकिस्तान के खेमे में खूब जाते देखा है। 1972 की अमेरिकी चीनी गठजोड़ से भी रु ब रु हुए हैं भारत के साथ लगभग ठंडे पर चुके रिश्तों को गर्माहट को तत्कालीन अमेरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भुनाया और बदलते दक्षिण पूर्व  एशिया में भारत के महत्व को सही मायने में समझा तथा उनके उत्तराधिकारियों ने इसे आगे बढ़ाया।

आज अमेरिका,भारत को अपना प्रमुख रक्षा साझीदार मानता है,यह जानते हुए भी की  करीब 60 फीसद रूसी सैन्य अवसंरचनात्मक प्लेटफॉर्म पर आधारित भारतीय सैन्य हार्डवेयर रसियन रोमांस से ओतप्रोत है। ट्रम्प पक्के देशभक्त संरक्षणवादी व्यवसायी राष्ट्रपति है जिनके लिए व्यापार और "अमेरिका" सबसे ऊपर है। भारत आज सभी विकसित देशों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है क्योंकि यहां विस्तृत बाज़ार, विशाल युवा जनसंख्या लाभांश,मजबूत सैन्यबल और संतुलन और अवरोध के लिए पाकिस्तान और चीन है।

रूस और अमेरिका के लिए भारत सदैव  detente 2.0 बना हुआ है और रहेगा,1973 में ब्रेझनेव -निक्सन से शुरू हुई इस परंपरा को फिलहाल ट्रम्प-पुतिन बरकरार रखे हुए हैं।

एस 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीददारी से चिढ़े हुए ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर CAATSA जैसे प्रावधानो में शामिल करने की धमकी दे डाली और अपनी GSP के सूची से भारत को हटा भी दिया पर भारत के दृढ़तापूर्वक रूसी हथियार प्रणाली के ख़रीद के निर्णय ने ट्रम्प प्रशासन को "अच्छे संकेत" दे दिए।
आज भारत को चीन,रूस और अमेरिका के बीच "संतुलन और अवरोध" के दृष्टि से सबसे बेहतरीन हृदयस्थल माना जा रहा है जिसका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को मिलने वाला है।

भारत और अमेरिका की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी:

1.आर्म्स डील: 2007 से शुरू हुआ यह अमेरिकी रोमांस आज अपने शिखर पर पहुँच चुका है, अब तक 15 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के रक्षा सौदों को मूर्त रूप दिया जा चुका है और कई समझौते अंतिम चरण में हैं जिसमे भारतीय सशस्त्र बल कम से कम पांच अमेरिकी सामरिक और रणनीतिक प्लेटफॉर्म का संचालन करता है,जिसमे लॉकहीड मार्टिन की ट्रूप्स आईरलिफ्टिंग के लिए C-130J सुपर हरक्यूलिस(C -130J Super Hercules),भीमकाय C-17 ग्लोबमास्टर3 सैन्य परिवहन विमान, समुद्र में लंबी निगरानी करने और पनडुब्बी रोधी वारफेयर में अव्वल. Poisiden8I(P-8I) विमान, बोइंग की सुपर हैवी लिफ्टर हेलीकाप्टर चिनूक (चिनूक सीएच-47),और बोइंग की अत्याधुनिक टैंक किलर हेलीकॉप्टर अपाचे, पंडुब्बीरोधी वारफेयर में माहिर हेलीकॉप्टर  एमएच 60 रोमियो एन्टी सबमरीन वारफेयर हेलीकॉप्टर,अल्ट्रा लाइट होवित्जर एम 77 तोप शामिल हैं।

2.जॉइंट प्रोजेक्ट: दोनो देशों के बीच कम से कम सात परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है,जिसमे एयरक्राफ्ट कैरियर तकनीक, जेट इंजिन,मोबाइल हाइब्रिड जेनेरेटर, आण्विक और जैव रासायनिक वारफेयर से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरण, फ्यूचरिस्टिक हेलीकॉप्टर, इन्फैंट्री कॉम्बैट वेहिकल(FICV) और लड़ाकू विमान F-16 या F-16/A-18 के उत्पादन लिए समझौता।

3.द्विपक्षीय समझौता: इसके तहत 2012 से शुरू हुए इस श्रेणी में
*Defence Technology & Trade Initiative (2012).
*Framework For India US Defence Relationship For another 10 years(2015)

*Joint Strategic Vision For Asia -Pacific & Indian Ocean Region(2015).

*India designated 'Major defence Partner' to faciliate defence technology sharing (2016).

*Logistic Exchange Memorandum of Agreement between to armed forces (2016) में शामिल है,आगामी होने वाले 2+2 वार्ता के बाद इस सूची में समझौतों की संख्या बढने की पूरी उम्मीद है।

संयुक्त कार्य करने के क्षेत्र।

इंडो पैसेफिक क्षेत्र,चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता(Quad) रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,मशीन लैंग्वेज,डेटा और एक्चुरियल साइंस,सूचना प्रौद्योगिकी के उभरते आयाम,अंतरिक्ष तकनीक,अनुसंधान और उसके अनुप्रयोग,स्वास्थ्य सेवा,शिक्षा और पर्यावरण विकास, संपोषणीय और धारणीय विकास के विभिन्न क्षेत्र,कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक,फ्यूचर एंड स्पेक्ट्रम वारफेयर   साइबर एंड स्पेस कमांड जैसे आधुनिक सैन्य तकनीकी विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी का आदान प्रदान करते हुए एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए।


भारत रूस सदा एक दूसरे के लिए।

भारत के लिए जहां रूस ट्रस्टेड, टाइम टेस्टेड,ऑल टाइम फ़ेवरेट विपरीत परिस्थितियों का सच्चा साथी,रुपये:रूबल,ब्रह्मपुत्र-मस्कोवा की जोड़ी,बहु ध्रुवीय विश्व व्यवस्था के साथी है। भारत ने हमेशा रूस के महत्व को स्वीकार किया है और विभिन्न मंचो से स्पष्ट किया है कि रूस के साथ उसके सम्बन्ध,वे अपने पूर्व साथियों और भागीदारों के साथ संबंधों की कीमत पर नहीं है।
भारत और रूस के सम्बंध दोनो देशों को परस्पर सामरिक और रणनीतिक लाभ देते है। चाहे वह S-400 मिसाइल सिस्टम हो या  
गलवां घाटी में चीन के साथ हुई सीमाई झड़प के फौरी बाद  मिग 29MKI और सुखोई 30 की त्वरित खरीद की हरी झंडी हो,इसके अतिरिक्त भारत और रूस के संबंधों को किसी के साथ तुलना करना बेमानी होगी, भारत और रूस के संबंध एक "विशेष सम्बन्ध"हैं इसलिए कोई तीसरा देश अगर इसे कमजोर करने के साजिश करता है तो उसकी यह "राजनयिक मूर्खता" होगी।
वर्तमान सरकार की पश्चिम के लिए अपने दरवाजे खोलने की नीति के चलते रूस से सैन्य हार्डवेयर के भारतीय आयात में कमी आ सकती है क्योंकि भारतीय रक्षा बाजार में  इस्राएल के अतिरिक्त अमेरिकी कम्पनियों के पैर तेजी से पसरते जा रहे हैं ।अमेरिकी मंशा यह है कि वह सैन्य हार्डवेयर क्षेत्र में रूस को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बने। 

सिक्के का दूसरा पहलू और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका,रूस की तरह "भारतीय जरूरत के उपयुक्त उपकरण" और "भारतीय हितों का ध्यान "बना और रख सकेगा ? जैसा रूस भारत के लिए करता आ रहा है, आईएनएस चक्र, और अन्य लड़ाकू विमान इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।

स्थिरता और मित्रता भारत-रूस आपसी सम्बन्धों की पहचान रहे हैं
समय द्वारा परखी हुई इस भागीदारी ने सुरक्षा,आतंकवाद आदि के मुद्दे पर निरन्तरता सुनिश्चितता की है। भारत-रूस के बीच हितों का कोई टकराव नहीं है और इसलिये इनके सम्बन्धो में कोई क्रांतिकारी बदलाव भी नहीं है,फिर भी बदलते भू:आर्थिक परिस्थितियों के सन्दर्भ में दोनों देशों को अपने हित में में दशकों पुराने सम्बन्ध को नए सिरे से नयी प्रतिमानों रचने की दरकार है जिसमे अमेरिकी फैक्टर का नामो निशान न हो। उम्मीद है रूसी नेतृत्व भारत के इस रचनात्मक रुख का समर्थन करेगा।