सवाल यह उठता है क्यों लड़कियो की शादी की उम्र में कटौती की जाए मेरा मानना है कि
लड़कियों की शादी की उम्र कतई नहीं घटानी चाहिए \,पता नहीं
क्यों इस
कल्याणकारी राष्ट्र में कहाँ से तालिबानी फरमानों की
स्वीकृति प्रदान की जाती है , और मीडिया भी मुखर स्वर में इस खबर को अपने
पन्नो में जगह देता है और उनको महिमामंडित करता , बलात्कार के
लिए सारा दोष लडकियों पर मढ़ता है वही खाप पंचायतो
की सुर में सुर मिलाते जिस तरह हुड्डा नजर आ रहे है वह कोई समाज के लिए शुभ संकेत नहीं
है और उनका यह तर्क की लडकियों को बलात्कार से
बचाने के लिए शादी की उम्र कम कर देना
भारत को अन्धकार युग और ढिबरी युग
में ले जाता है A कानून
व्यवस्था की थाह नहीं है प्रदेश में , सरेआम एक पर
एक बलात्कार की घटनाए और आलाकमान का
पीड़ितों को सुहानभुती से गले लगाने से यह समस्या का समाधान मुमकिन नहीं हैZAसनद रहे की ये बलात्कार की घटनाए
दलित समाज की लडकियों के साथ हुआ है पर बलात्कार किसी भी सभ्य समाज
में सबसे घृणित कृत्यों में से है ,और इसका हर स्तर पर
पूर्ण प्रतिरोध अवश्य किया जाना चाहिए और दोषियों को सजा देने के क्रम में
कोई मुर्रब्बत नहीं बरतनी चाहिएAचिकित्सा
विज्ञानी और समाजशास्त्रियों का स्पष्ट मानना है की
बलात्कार पश्चात लडकियों और महिलाओ की शारीरिक और मानसिक स्तर पर अत्यधिक
विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसका जीवंत उदहारण हम अरुणा शानबाग के रूप में देख सकते है जो
जीवित् हो कर भी मृत्यप्राय अवस्था में हैAसबसे अहम् सवाल है कि लडकियों की शादी की उम्र घटने से बलात्कार कैसे रुकेगी, क्या सी एम् साहब के
पास अगर कोई पुख्ता कार्य योजना है तो केन्द्र सरकार को बताये
, समाज उनका इस नए नवोन्मेषी योजना को कार्यान्वित
करेगा, लेकिन पता नहीं क्यों
राज्य की चिरनिद्रा एक महीने में १९ बलात्कार की
घटनाओ के बाद टूटी,विपक्षी दल ,उनके साथ
मानवाधिकार संगठनो,महिलाआयोग ,और तमाम नारीवादी
संगठनो को महिलाओं और लडकियों पर हो रहे बलात्कार की सुधि लेने की रत्ती
भर आवश्यकता नहीं समझी,हरियाणा जैसे विकसित हो रहे राज्य में बलात्कार की घटनाए सोचने के लिए मजबूर करती है
की कैसे महिलाएं सुरक्षित रहे,हरियाणा में पिछले करीब एक महीने के दौरान डेढ़ दर्ज़न महिलाओं के साथ ज्यादती
की घटना के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर आ चुकी हैं।
राज्य में जगह-जगह पुलिस और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। राष्ट्रीय
अनुसूचित जाति आयोग से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक ने इसपर कड़ा संज्ञान लिया
है।आज हम हरियाणा को कल्पना चावला,सायना नेहवाल के रूप में
और अब सिविल सेवा ११ की टापर शेना अग्रवाल के नाम से भी जानने लगे है,ij इस तरह की घटनाए
संपूर्ण राष्ट्र को शर्मशार करती है,कम उम्र में शादी की सलाह तो महज सरकार की ओछी
मानसिकता को दर्शाता vkSj यह बलात्कार के जरिए कमजोर वर्ग
के हौंसले पस्त करने की साजिश है.इक्कीसवीं सदी में यह सब कितनी घिनौनी समझ है.bls crkus dh dksb tjwjr ugh gS] आज जरूरत है की सरकार दोषियों के साथ प्रबल राजनीतिक
इक्षाशक्ति के साथ कड़ी कारवाई एवं कार्यवाही करके आम जनता को सरकार के होने का एहसास कराए और कबीलाई मानसिकता से महिलाओ को मुक्त
करे